Bastar News Update: बस्तर। भीषण गर्मी से जूझ रहे बस्तर में मौसम ने अचानक करवट ले ली। बुधवार दोपहर तेज हवा, बारिश और कई जगह ओलावृष्टि दर्ज की गई। बारिश से लोगों को गर्मी से राहत जरूर मिली, लेकिन किसानों के लिए यह मौसम नई मुसीबत बन गया है। ग्रीष्मकालीन फसल और वनोपज को नुकसान की खबरें सामने आई हैं।
कुछ इलाकों में तेज अंधड़ से पेड़ गिर गए, जबकि कई स्थानों पर मकानों के छप्पर उड़ने की भी सूचना है। विशेषज्ञ इसे वन क्षेत्र में कमी का प्रभाव मान रहे हैं। पिछले वर्ष भी इसी तरह असमय बारिश से फसलों को नुकसान हुआ था, जिससे किसान एक बार फिर चिंतित हैं।

सुसाइड नोट से भड़का आक्रोश, कार्रवाई की मांग पर चक्काजाम
बीजापुर। जिले में प्रधान आरक्षक की आत्महत्या के बाद मामला तूल पकड़ गया है। पालनार स्कूल में पदस्थ कर्मचारी ने घर के पास फांसी लगाकर जान दे दी। मृतक के पास मिले सुसाइड नोट में ठेकेदार, इंजीनियर और अधिकारियों पर दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। नोट में भवन निर्माण राशि निकालने को लेकर लगातार दबाव का जिक्र किया गया है।
घटना के बाद परिजन और ग्रामीण आक्रोशित हो गए और जिला अस्पताल के पास मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने दोषियों की गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग की।
प्रशासन ने तीन दिन में कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद जाम समाप्त हुआ। हालांकि क्षेत्र में अब भी तनाव और आक्रोश की स्थिति बनी हुई है।
नशे के कारोबार पर पुलिस का बड़ा वार, 10 लाख की नशीली खेप जब्त
जगदलपुर। बस्तर पुलिस ने नशा कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दो तस्करों को गिरफ्तार किया है। बोधघाट थाना क्षेत्र में घेराबंदी कर यह कार्रवाई की गई। गंगामुंडा तालाब चौपाटी के पास आरोपी ग्राहक का इंतजार कर रहे थे, तभी पुलिस ने दबिश दी। तलाशी के दौरान बैग से 2400 प्रतिबंधित नशीली कैप्सूल बरामद हुईं, जिनकी कीमत करीब 9.60 लाख रुपये आंकी गई है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राजेश यादव और मोनू गुप्ता के रूप में हुई है। पूछताछ में सामने आया कि वे पंचर दुकान की आड़ में यह अवैध कारोबार चला रहे थे। पुलिस ने दोनों को एनडीपीएस एक्ट के तहत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
उपभोक्ता आयोग की अतिरिक्त बेंच शुरू, लंबित मामलों को मिलेगी रफ्तार
बस्तर। राज्य उपभोक्ता आयोग में अतिरिक्त बेंच की शुरुआत के साथ सुनवाई फिर से शुरू हो गई है। इसे लंबित मामलों के निपटारे की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
कोरोना काल में बंद हुई यह पीठ अब दोबारा सक्रिय हुई है और पहले ही दिन से मामलों की सुनवाई शुरू कर दी गई। प्रदेशभर में हजारों मामले वर्षों से लंबित हैं।
विशेषकर रायपुर और जगदलपुर में उपभोक्ता मामलों की संख्या अधिक है। बीमा, बैंकिंग और सेवा विवाद सबसे ज्यादा लंबित हैं। नई व्यवस्था से 90 दिन में मामलों के निपटारे की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिल सकती है।
पंचायत फंड में गड़बड़ी का आरोप, जांच की मांग तेज
बस्तर। बकावंड ब्लॉक की छोटेदेवड़ा पंचायत में वित्त आयोग की राशि को लेकर विवाद गहरा गया है। सरपंच ने कमिश्नर को शिकायत भेजकर गबन और धोखाधड़ी की जांच की मांग की है।
आरोप है कि 2 लाख 17 हजार रुपये की सीसी सड़क कागजों में बना दी गई, जबकि जमीनी हकीकत अलग है। ग्रामीणों ने भी दस्तावेजों पर सवाल उठाए हैं।
शिकायत में पंचायत सचिव समेत अन्य पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। 11 पंचों ने भी जांच की मांग का समर्थन किया है।
अब पूरा मामला प्रशासनिक जांच के दायरे में है और ग्रामीण निष्पक्ष कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
सुकमा में औद्योगिक कचरा डंपिंग पर विवाद, पर्यावरण पर खतरे की आशंका
सुकमा। जिले में खनिज विभाग के आदेश के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। दंतेवाड़ा से लौह अयस्क अपशिष्ट को शहर क्षेत्र में लाने की अनुमति दी गई है। करीब 1.25 लाख मैट्रिक टन टेलिंग्स का उपयोग भूमि भराव में किया जाना है, जिस पर विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं।
पर्यावरणविदों का कहना है कि इससे धूल कणों के कारण श्वास संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। भारी वाहनों की आवाजाही से सड़क दुर्घटनाओं की संभावना भी बढ़ेगी।
हालांकि आदेश में तिरपाल से ढककर परिवहन और वृक्षारोपण जैसी शर्तें रखी गई हैं, लेकिन स्थानीय लोग अभी भी चिंतित हैं।
लोडिंग प्लांट में हुए दर्दनाक हादसे ने खोली सुरक्षा व्यवस्था की पोल
दंतेवाड़ा। बचेली के लोडिंग प्लांट में हुए दर्दनाक हादसे में 25 वर्षीय मजदूर अजय भोगामी गंभीर रूप से घायल हो गया। ट्रेन की चपेट में आने से उसके दोनों पैर और हाथ बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। घटना के बाद उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कर रेफर किया गया। बताया गया कि वह हाल ही में नौकरी पर लौटा था।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि हादसे के समय मजदूर के पास सुरक्षा उपकरण नहीं थे। न तो सेफ्टी शूज, न हेलमेट और न ही ग्लव्स उपलब्ध थे। संवेदनशील क्षेत्र में सुपरवाइजर की गैरमौजूदगी भी सामने आई है। मजदूर संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
फूलों की खुशबू में रोजगार की संभावनाएं, लेकिन किसान अब भी पीछे
बस्तर में फूलों का कारोबार अब सिर्फ त्योहारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सालभर इसकी मांग बनी रहती है। दीपावली, दशहरा और छठ जैसे बड़े पर्वों पर बाजारों में फूलों की खपत कई गुना बढ़ जाती है। इसके बावजूद स्थानीय किसान अब तक बड़े स्तर पर फूलों की खेती से नहीं जुड़ पाए हैं।
व्यापारी अब भी रायपुर, कोलकाता और राजमहेंद्रवरम से फूल मंगाकर स्थानीय मांग पूरी कर रहे हैं। गुलाब समेत कई किस्मों के फूल बाहर से आने के कारण बाजार पूरी तरह बाहरी सप्लाई पर निर्भर है।
पिछले वर्ष उद्यानिकी विभाग ने किसानों को गेंदे के बीज वितरित किए थे, जिसके बाद कुछ किसानों ने सब्जियों के साथ इसकी खेती शुरू भी की है। विशेषज्ञों के मुताबिक गेंदे की खेती से किसानों को दोहरा लाभ मिलता है—फूलों की बिक्री से आमदनी और कीट नियंत्रण में मदद।
त्योहारी सीजन में गेंदे का दाम 120 से 150 रुपये किलो तक पहुंच जाता है। यदि किसान बड़े स्तर पर आगे आएं तो बस्तर फूल उत्पादन का बड़ा केंद्र बन सकता है और इससे रोजगार व आय दोनों में वृद्धि होगी।
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