संजीव शर्मा, कोंडागांव। जिले के विश्रामपुरी से गंभीर मामला सामने आया है, जहां सीएचसी में ग्राम पिटेचुआ कोटवारपारा निवासी 32 वर्षीय मिथिला नेताम की इंजेक्शन लगाए जाने के बाद अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि विश्रामपुरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ लैब टेक्नीशियन सहदेव वर्मा ने अपने निजी क्लिनिक में महिला का ब्लड सैंपल लेने के बाद उसे इंजेक्शन लगाया, जिसके कुछ ही देर बाद उसकी हालत बिगड़ गई। महिला को तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

मृतका के पति सुनील कुमार नेताम के अनुसार, 18 अगस्त की सुबह मिथिला की तबीयत खराब थी। इसी दौरान ब्लड टेस्ट कराने के लिए वे उसे विश्रामपुरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ लैब टेक्नीशियन सहदेव वर्मा के घर लेकर गए थे। मृतका के देवर विजय नेताम ने आरोप लगाया कि सहदेव वर्मा ने पहले मिथिला का ब्लड सैंपल लिया और इसके बाद उसके हाथ में इंजेक्शन लगाया। परिजनों का कहना है कि इंजेक्शन लगने के तुरंत बाद मिथिला की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। देखते ही देखते वह बेहोश हो गई। उसकी हालत गंभीर होता देख परिजन उसे तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र विश्रामपुरी लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। अचानक हुई मौत के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है।

मौत के बाद परिजनों में आक्रोश, थाने में की शिकायत

महिला की मौत के बाद परिजन आक्रोशित हुए और तत्काल विश्रामपुरी थाना पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम कराया है। फिलहाल संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही महिला की मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।

मृतिका के तीन बच्चे, परिवार को मुआवजा देने की मांग

मृतिका के देवर विजय नेताम ने कहा, लैब टेक्नीशियन ने कौन सा इंजेक्शन लगाया, इसकी जानकारी नहीं है। इंजेक्शन के बाद भाभी की तबीयत बिगड़ने लगी थी, तुरंत उन्हें अस्पताल लेकर गए तो डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। हम पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। मृतिका के तीन बच्चे हैं, इसलिए परिवार को उचित मुआवजा भी दिया जाए।

लैब टेक्नीशियन को इंजेक्शन लगाने की अनुमति नहीं : बीएमओ

इस मामले में विश्रामपुरी बीएमओ डॉ. अनुराग भारती ने बताया कि परिजनों के अनुसार महिला लैब टेक्नीशियन के यहां इंजेक्शन लगवाने गई थी, जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ी। उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन के नियमानुसार लैब टेक्नीशियन को इंजेक्शन लगाने अथवा उपचार करने की अनुमति नहीं है। स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित लैब टेक्नीशियन सहदेव वर्मा से स्पष्टीकरण मांगा है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे कई गंभीर सवाल

इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब स्वास्थ्य विभाग खुद यह स्पष्ट कर रहा है कि लैब टेक्नीशियन को इंजेक्शन लगाने या मरीज का उपचार करने की अनुमति नहीं है तो सवाल उठता है कि सहदेव वर्मा द्वारा महिला को इंजेक्शन किस आधार पर लगाया गया? क्या उनके पास किसी डॉक्टर की अनुमति थी? अगर अनुमति नहीं थी तो स्वास्थ्य विभाग की निगरानी में यह सब कैसे चलता रहा? महिला को आखिर कौन सा इंजेक्शन लगाया गया था? वह इंजेक्शन किसने लिखा था? किस डॉक्टर ने उसकी सलाह दी थी? इंजेक्शन की डोज क्या थी और उसे लगाने का अधिकार किसके पास था? इन तमाम सवालों के जवाब अब पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की जांच में तलाशे जाएंगे। यदि परिजनों के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला सिर्फ लापरवाही का नहीं, बल्कि नियमों की अनदेखी का भी गंभीर मामला बन सकता है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

फिलहाल महिला की मौत का कारण स्पष्ट नहीं है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही यह सामने आएगा कि मिथिला नेताम की मौत की वास्तविक वजह क्या थी और इंजेक्शन का उससे कोई प्रत्यक्ष संबंध था या नहीं। पुलिस संबंधित लोगों के बयान दर्ज कर रही है। वहीं स्वास्थ्य विभाग भी अपनी स्तर पर जांच कर रहा है।

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