रोहित कश्यप, मुंगेली। छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में मुंगेली जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) द्वारा जारी एक आदेश ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। एक ओर जहां लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) प्रदेशभर में वर्षों से विभिन्न कार्यालयों में संलग्न (अटैच) शिक्षकों एवं कर्मचारियों को कार्यमुक्त करने की प्रक्रिया चला रहा है, वहीं दूसरी ओर मुंगेली में जारी एक आदेश में एक संकुल शैक्षिक समन्वयक (CAC) को प्रभारी सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी (ABEO) का दायित्व सौंप दिया गया है। इस आदेश के बाद विभागीय स्तर पर इसकी वैधानिकता को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

06 जुलाई को जारी हुआ आदेश
जिला शिक्षा अधिकारी, मुंगेली द्वारा 06 जुलाई 2026 को जारी आदेश क्रमांक 3778/स्था.1/2026-27 के अनुसार नेमीचंद भास्कर, संकुल शैक्षिक समन्वयक, कार्यालय पीएम श्री सेजेस दाऊपारा, मुंगेली को प्रशासनिक दृष्टिकोण से कार्य व्यवस्था के तहत प्रभारी सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी (ABEO), मुंगेली का दायित्व आगामी आदेश तक सौंपा गया है।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि उनका वेतन मूल पदस्थ शाला से ही आहरित होगा, नियमित एबीईओ की पदस्थापना होने पर आदेश स्वतः समाप्त हो जाएगा तथा वे अपने पूर्व दायित्वों का भी निर्वहन करते रहेंगे। आदेश की प्रतिलिपि संचालक लोक शिक्षण संचालनालय, कलेक्टर मुंगेली, संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग बिलासपुर सहित संबंधित अधिकारियों को भेजी गई है।
डीपीआई के अटैचमेंट समाप्त करने के निर्देशों के बीच आदेश
हाल ही में लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों को कार्यालयों में वर्षों से संलग्न शिक्षकों एवं कर्मचारियों का अटैचमेंट समाप्त कर उन्हें मूल पदस्थापना पर भेजने के निर्देश दिए थे। इसके अनुपालन में कई जिलों से शिक्षकों और कर्मचारियों को कार्यमुक्त किए जाने की जानकारी भी डीपीआई को भेजी जा रही है।
इसी बीच मुंगेली में जारी इस आदेश ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि जब विभाग अटैचमेंट समाप्त करने की कार्रवाई कर रहा है, तब कार्य व्यवस्था के तहत एक कर्मचारी को प्रभारी एबीईओ का दायित्व किस आधार पर सौंपा गया।
‘CAC’ लिखे जाने पर भी उठ रहे सवाल
आदेश में संबंधित कर्मचारी का पदनाम “संकुल शैक्षिक समन्वयक (CAC)” अंकित किया गया है। हालांकि, विभागीय सूत्रों का दावा है कि संबंधित कर्मचारी का मूल संवर्ग शिक्षण संवर्ग का है। इसी आधार पर यह भी चर्चा है कि आदेश में मूल शिक्षक पदनाम के स्थान पर “CAC” लिखे जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
देखें आदेश

हाईकोर्ट ने सुनाया था ये फैसला
गौरतलब है कि यह आदेश ऐसे समय में सामने आया है, जब हाल ही में बिलासपुर हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग में शिक्षण संवर्ग के कर्मचारियों को प्रशासनिक पदों का प्रभार दिए जाने पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है।

न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की एकलपीठ ने प्रतापपुर (जिला सूरजपुर) के मामले की सुनवाई करते हुए कहा था कि ‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009’ की धारा 27 के अनुसार शिक्षकों को चुनाव, जनगणना अथवा कानून द्वारा निर्धारित विशेष परिस्थितियों को छोड़कर गैर-शैक्षणिक एवं प्रशासनिक कार्यों में नहीं लगाया जा सकता।
कोर्ट ने यह भी माना कि छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा (शैक्षणिक एवं प्रशासनिक संवर्ग) भर्ती तथा पदोन्नति नियम, 2026 के अनुसार बीईओ पद का फीडर चैनल निर्धारित है। नियमों के तहत यह पद मुख्यतः एबीईओ की पदोन्नति तथा निर्धारित प्रशासनिक संवर्ग से भरा जाना है। इसी आधार पर कोर्ट ने शिक्षक संवर्ग के एक व्याख्याता को प्रभारी बीईओ बनाए जाने का आदेश निरस्त कर दिया था।
जानिए डीईओ ने क्या कहा ?
मुंगेली जिला शिक्षा अधिकारी एल.पी. डाहिरे ने इस संबंध में कहा कि मुंगेली विकासखंड में सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी (ABEO) के तीन स्वीकृत पद हैं, लेकिन वर्तमान में तीनों पद रिक्त अथवा कार्यरत अधिकारियों के उपलब्ध नहीं होने के कारण प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
उन्होंने बताया कि एक एबीईओ अजय निर्मलकर का स्थानांतरण जांजगीर-चांपा हो चुका है। दूसरे एबीईओ प्रदीप दिवाकर लंबे अवकाश पर हैं, जबकि तीसरी एबीईओ विमित्रा धृतलहरे को विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। ऐसे में विकासखंड स्तर पर एबीईओ के दायित्वों के निर्वहन के लिए कोई अधिकारी उपलब्ध नहीं था।
डीईओ ने कहा कि नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है और विभागीय कार्यों का निर्बाध संचालन सुनिश्चित करना आवश्यक था। इसी प्रशासनिक आवश्यकता को देखते हुए कार्य व्यवस्था के तहत सीएसी (CAC) को प्रभारी एबीईओ का अतिरिक्त दायित्व सौंपा गया है।
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