वरिष्ठ कांग्रेस नेता वजीर सिंह पूनिया ने चैनत गांव के ग्रामीणों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग की है। उन्होंने गांव में पेयजल संकट के समाधान पर जोर दिया।

विनोद सैनी, हिसार। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और ऑल इंडिया राहुल गांधी कांग्रेस कमेटी के सदस्य वजीर सिंह पूनिया ने सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए हिसार के चैनत गांव के ग्रामीणों पर दर्ज झूठे मुकदमे तत्काल वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधा की मांग करना ग्रामीणों का संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकार है। चैनत गांव लंबे समय से गंभीर पेयजल संकट से जूझ रहा है और प्रशासन की उदासीनता के कारण ग्रामीणों को मजबूरन आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। पूनिया के अनुसार, समस्या का समाधान करने के बजाय प्रशासन द्वारा ग्रामीणों पर मुकदमा दर्ज करना जनभावनाओं को कुचलने जैसा दुर्भाग्यपूर्ण कदम है।

ग्रामीणों की जायज मांगों का दमन

पूनिया ने विस्तार से बताया कि चैनत गांव में पिछले कई दिनों से हालात बदतर हैं, जहां महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे एक बूंद पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह हर नागरिक को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराए, लेकिन चैनत के मामले में प्रशासन पूरी तरह विफल साबित हुआ है। ग्रामीणों ने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज उठाई थी, जिसे दबाने के लिए प्रशासन ने दंडात्मक कार्रवाई का सहारा लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधि जनता की बुनियादी समस्याओं की अनदेखी कर अपने निजी हितों में व्यस्त हैं। इस बेरुखी के कारण गांव के निवासियों में भारी रोष है और क्षेत्र में प्रशासनिक विफलता साफ झलक रही है।

सरकार को दी बड़ा आंदोलन की चेतावनी

वजीर सिंह पूनिया ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने ग्रामीणों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस नहीं लिए और जल्द ही पेयजल आपूर्ति का स्थायी समाधान नहीं किया, तो कांग्रेस पार्टी चुप नहीं बैठेगी। उन्होंने सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया कि लोकतंत्र में जनता की आवाज को दबाना बंद करें और ग्रामीणों की मांगों पर तत्काल सकारात्मक कार्रवाई करें। पूनिया ने आश्वासन दिया कि कांग्रेस पार्टी ग्रामीणों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है और उनके अधिकारों के लिए किसी भी हद तक संघर्ष करने को तैयार है। ग्रामीणों की मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में कांग्रेस अपने लोकतांत्रिक संघर्ष को और तेज करेगी, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी सरकार की होगी।