अशोक कुमार जायसवाल, चंदौली. ग्राम गोपालपुर निवासी बृजेश कुमार मौर्य ने जिलाधिकारी चंदौली को प्रार्थना पत्र सौंपकर ग्राम प्रधान फातिमा बेगम पर उनकी निजी भूमि का गेट तोड़कर जबरन रास्ता बनाने का प्रयास करने का आरोप लगाया है. शिकायतकर्ता ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई, क्षतिग्रस्त गेट दोबारा लगवाने और उनकी निजी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है.
प्रार्थना पत्र के अनुसार, बृजेश कुमार मौर्य ने बताया कि उनकी माता स्वर्गीय फूला देवी ने वर्ष 2008 में मौजा हमीदपुर स्थित आराजी संख्या 220 की लगभग 126.59 वर्गमीटर भूमि का विधिवत क्रय किया था. इस भूमि पर वर्षों से उनका वैध कब्जा है. उन्होंने अपनी जमीन पर चारदीवारी कराकर मुख्य प्रवेश द्वार (गेट) भी स्थापित कराया था. शिकायतकर्ता का आरोप है कि 27 सितंबर 2025 को ग्राम प्रधान फातिमा बेगम अपने कुछ समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचीं और कथित रूप से उनके गेट को तोड़ दिया. इसके बाद उनकी निजी भूमि से जबरन रास्ता निकालने का प्रयास किया गया. बृजेश कुमार मौर्य का कहना है कि पूरी घटना का वीडियो उनके पास सुरक्षित है, जिसे जांच के दौरान साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है.
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जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र में शिकायतकर्ता ने यह भी उल्लेख किया है कि इस मामले को लेकर वह कई बार तहसील, समाधान दिवस, जिला प्रशासन तथा डीएम आवास तक अपनी शिकायत लेकर जा चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिला. उनका कहना है कि वह लगातार अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रख रहे हैं और निष्पक्ष कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं. मीडिया से बातचीत में बृजेश कुमार मौर्य ने कहा कि ग्राम प्रधान ने पुलिस बुलाकर उन्हें थाने भेज दिया और उनकी अनुपस्थिति में उनके गेट को तुड़वा दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ दबंगई की गई और उनकी निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया.
पीड़ित ने प्रशासन से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, उनका गेट दोबारा लगवाया जाए और जिन लोगों ने कथित रूप से उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है, उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए. हालांकि, इस मामले में ग्राम प्रधान फातिमा बेगम का पक्ष सामने नहीं आया है. वहीं, प्रशासन की ओर से भी अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. मामले की वास्तविक स्थिति और शिकायतों की सत्यता का निर्धारण प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा.


