चंडीगढ़। चंडीगढ़ में अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर आज (सोमवार) कैब ड्राइवरों ने आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। बड़ी संख्या में लामबंद हुए ड्राइवरों ने सेक्टर-25 स्थित रैली ग्राउंड में एक विशाल रोष प्रदर्शन किया। इस दौरान चंडीगढ़ प्रशासन के अड़ियल रवैये से नाराज ड्राइवरों ने अनोखे अंदाज में प्रशासन की प्रतीकात्मक अर्थी निकालकर अपना तीखा विरोध दर्ज कराया और जमकर नारेबाजी की।
कैब चालकों ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों पर जल्द ही कोई ठोस फैसला नहीं लिया, तो आने वाली 16 जून को इससे भी बड़ा आंदोलन किया जाएगा और शहर में पूर्ण रूप से ‘चक्का जाम’ हड़ताल की जाएगी।
महंगाई ने तोड़ी कमर, मौजूदा किराए में गुजारा नामुमकिन
प्रदर्शन में शामिल कैब ड्राइवरों ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि लगातार बढ़ रही बेतहाशा महंगाई, आसमान छूती पेट्रोल-डीजल व सीएनजी (CNG) की कीमतों और गाड़ियों के मेंटेनेंस के बढ़ते खर्चों ने उनकी आर्थिक कमर तोड़कर रख दी है।
ड्राइवरों ने बताया कि इन सभी खर्चों में कई गुना बढ़ोतरी होने के बावजूद पिछले लंबे समय से कैब के आधिकारिक किराए (फेयर रेट्स) में कोई बदलाव नहीं किया गया है। मौजूदा किराया दरें इतनी कम हैं कि अब परिवार का पालन-पोषण करना और दो वक्त की रोटी कमाना भी बेहद मुश्किल हो गया है।
प्रशासन के खिलाफ वादाखिलाफी के आरोप
सेक्टर-25 के रैली ग्राउंड में जुटे प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ ‘मुर्दाबाद’ के नारे लगाए और अर्थी फूंक कर रोष जताया। ड्राइवरों का कहना है कि वे इससे पहले भी कई बार लिखित रूप में प्रशासनिक अधिकारियों को अपनी समस्याओं से अवगत करवा चुके हैं, लेकिन आज तक न तो उनकी कोई सुनवाई हुई और न ही कोई ठोस कार्रवाई अमल में लाई गई। उन्होंने कहा कि अगर अब भी उनकी आवाज को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो 16 जून को ट्राइसिटी स्तर पर एक बड़ी हड़ताल कर प्रशासन पर दबाव बनाया जाएगा।
ऐप आधारित कंपनियों पर गंभीर आरोप, प्राइवेट गाड़ियों के कमर्शियल इस्तेमाल पर रोक की मांग
प्रदर्शन के दौरान ड्राइवरों ने ओला-उबर जैसी विभिन्न ऐप आधारित निजी कैब कंपनियों के कामकाज और उनकी नीतियों पर भी गंभीर सवाल उठाए। ड्राइवरों का आरोप है कि चंडीगढ़ ट्राइसिटी (चंडीगढ़, मोहाली, पंचकुला) में नियमों की धज्जियां उड़ाकर ‘सफेद नंबर प्लेट’ (निजी वाहनों) वाली गाड़ियों को धड़ल्ले से कमर्शियल कैब सेवाओं के रूप में चलाया जा रहा है, जो कि पूरी तरह से गैर-कानूनी है।

कैब ड्राइवरों ने कहा कि इन निजी गाड़ियों के अवैध संचालन के कारण भारी-भरकम टैक्स और कमर्शियल परमिट लेकर काम करने वाले वैध ड्राइवरों के रोजगार पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। जो ड्राइवर सरकार को टैक्स दे रहे हैं और सभी कानूनी नियमों का पालन कर रहे हैं, वे आज घाटे में हैं; जबकि निजी वाहन मालिक बिना किसी नियम या टैक्स के मुनाफा कमा रहे हैं। ड्राइवरों ने चंडीगढ़ प्रशासन से ऐसी गैर-कानूनी गाड़ियों पर तुरंत शिकंजा कसने और उन्हें ऐप से बाहर करने की मांग की है।
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