दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश होटल में हुए भीषण अग्निकांड (Flourish Hotel fire) के मामले में दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने मंगलवार को होटल मालिक समेत 3 आरोपियों के खिलाफ साकेत कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल (Chargesheet filed) कर दिया। यह हादसा 3 जून को हुआ था, जिसमें 22 लोगों की मौत हुई थी। मृतकों में 13 विदेशी नागरिक भी शामिल थे।पुलिस के मुताबिक, 3 जून को फ्लोरिश होटल में आग लगने के बाद बड़ी संख्या में लोग इसकी चपेट में आ गए थे। घटना में 22 लोगों की जान गई थी। हादसे के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आग लगने की परिस्थितियों के साथ होटल प्रबंधन की भूमिका की भी जांच की। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने होटल मालिक समेत तीन आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र अदालत में पेश किया है।
पुलिस ने आरोपपत्र में होटल मालिक लोकेश बजाज, होटल के अकाउंटेंट बताए गए जय मिश्रा और कुक केसर नेगी को आरोपी बनाया है। मंगलवार को जय मिश्रा को न्यायिक हिरासत से अदालत में पेश किया गया। वहीं, होटल मालिक लोकेश बजाज भी न्यायिक हिरासत में है, लेकिन फिलहाल अस्पताल में भर्ती होने के कारण उसे अदालत में पेश नहीं किया गया। तीसरे आरोपी केसर नेगी को अदालत से पहले ही जमानत मिल चुकी है। ड्यूटी मजिस्ट्रेट अरीबा खान की अदालत ने पुलिस की ओर से दाखिल आरोपपत्र पर विचार के लिए 3 सितंबर की तारीख तय की है। अदालत अब आरोपपत्र में लगाए गए आरोपों और पुलिस की ओर से जुटाए गए साक्ष्यों पर विचार करेगी।
इलाज के लिए दिल्ली आए परिजन होटल में ठहरे थे
पुलिस के मुताबिक, होटल में आग इतनी तेजी से फैली कि वहां ठहरे लोगों को संभलने और बाहर निकलने का पर्याप्त मौका नहीं मिल सका। होटल में ठहरने वालों में बड़ी संख्या उन लोगों की थी, जो पास के मैक्स अस्पताल में इलाज करा रहे मरीजों के साथ दिल्ली आए थे। इनमें कई विदेशी नागरिक भी शामिल थे, जो अपने परिजनों के इलाज के सिलसिले में राजधानी पहुंचे थे और होटल में ठहरे हुए थे।
होटल मालिक पर कई गंभीर धाराओं में आरोप
पुलिस ने होटल मालिक लोकेश बजाज के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत आरोप लगाए हैं। इनमें धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या), धारा 326(जी) (आग लगाकर नुकसान पहुंचाना), धारा 324(5) (संपत्ति को नुकसान पहुंचाना), धारा 125 (किसी व्यक्ति के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालना) और धारा 287 (आग से संबंधित लापरवाही से काम करना) शामिल हैं।
छह कमरों की अनुमति, 25-26 कमरे चलाने का आरोप
फ्लोरिश होटल अग्निकांड के बाद हुई शुरुआती जांच में होटल के संचालन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आए थे। रिपोर्टों के मुताबिक, होटल को ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ के तौर पर केवल छह कमरों के संचालन की अनुमति मिली थी, जबकि वहां करीब 25-26 कमरे संचालित किए जा रहे थे। जांच में होटल के पास फायर सेफ्टी NOC नहीं होने की बात भी सामने आई थी। इसके अलावा होटल में आने-जाने के लिए केवल एक ही प्रवेश-निकास मार्ग होने और आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने की जानकारी सामने आई थी।
रसोई से फैली आग, ऊपरी मंजिलों तक पहुंचा धुआं
जांच के मुताबिक, होटल के निचले हिस्से में स्थित रसोई से आग फैलने के बाद धुआं और आग तेजी से ऊपरी मंजिलों तक पहुंच गई। इससे कई लोग कमरों में फंस गए और उन्हें बाहर निकलने में परेशानी हुई। घटना के दौरान कुछ लोगों ने बचने के लिए खिड़कियों का सहारा लिया था। हादसे की गंभीरता को देखते हुए होटल की सुरक्षा व्यवस्था, लाइसेंस की शर्तों और कथित लापरवाही से जुड़े सभी पहलुओं की पुलिस जांच कर रही है।
अकाउंटेंट ने 8 जून को किया था आत्मसमर्पण
पुलिस के अनुसार, होटल के अकाउंटेंट बताए गए जय मिश्रा ने 8 जून को अदालत के सामने आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया। मंगलवार को उसे इसी न्यायिक हिरासत से अदालत में पेश किया गया। वहीं, होटल के कुक केसर नेगी को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। बाद में साकेत कोर्ट ने 27 जुलाई को उसे जमानत दे दी। फिलहाल इस मामले में होटल मालिक लोकेश बजाज और जय मिश्रा न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि केसर नेगी जमानत पर बाहर है।
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