राकेश चतुर्वेदी, छतरपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में महात्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना का काम तेज गति से चल रहा है। परियोजना के कारण विस्थापित और प्रभावित हो रहे ग्रामीणों के पुनर्वास तथा मुआवजे के लिए प्रशासन मुस्तैदी से जुटा हुआ है। इसी बीच ऐसे कई ग्रामीण सामने आए हैं, जिनके पास जन्मतिथि या उम्र से जुड़ा कोई सरकारी दस्तावेज (जैसे अंकसूची या जन्म प्रमाणपत्र) उपलब्ध नहीं है। ऐसे मामलों में पात्रता तय करने के लिए छतरपुर जिला प्रशासन ने मेडिकल जांच का अनूठा रास्ता अपनाया है, ताकि कोई भी पात्र हितग्राही मुआवजे से वंचित न रहे।
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आधार कार्ड नहीं मान्य, एक्स-रे और बोन डेंसिटी टेस्ट से तय होगी उम्र
प्रोजेक्ट से प्रभावित कई ग्रामीणों का कहना है कि उनके पास पहचान पत्र के रूप में आधार कार्ड तो मौजूद है, लेकिन उम्र के सटीक भौतिक सत्यापन के लिए प्रशासन उसे पर्याप्त आधार नहीं मान रहा है। इस व्यावहारिक समस्या को हल करने के लिए जिला चिकित्सालय में प्रभावितों का एक्स-रे (X-Ray) और बोन डेंसिटी टेस्ट कराया जा रहा है। डॉक्टरों की मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर वैज्ञानिक तरीके से ग्रामीणों की वास्तविक उम्र निर्धारित की जा रही है, जिसके बाद उन्हें मुआवजे और पुनर्वास पैकेज का लाभ दिया जाएगा।
घर-घर पहुंच रहे कलेक्टर व प्रशासनिक अधिकारी; 180 लोगों की जांच
शासन का स्पष्ट निर्देश है कि दस्तावेजों की कमी की वजह से कोई भी वास्तविक पीड़ित सरकारी लाभ से न छूटे। हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचने के लिए जिला कलेक्टर सहित प्रशासनिक अधिकारियों की टीमें घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं और छूटे हुए लोगों के नाम सूची में जोड़ रही हैं। जिला पंचायत सीईओ के अनुसार, अब तक करीब 180 विस्थापित ग्रामीणों का मेडिकल परीक्षण कराया जा चुका है। आगे भी ऐसे प्रकरण सामने आने पर मेडिकल जांच की यह प्रक्रिया निरंतर जारी रहेगी।
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प्रशासन की मंशा साफ: हर पात्र को मिलेगा पुनर्वास का हक
केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों को शुरुआती स्तर पर जांच प्रक्रिया के दौरान थोड़ी असहजता जरूर हो रही है, लेकिन वे इस व्यवस्था से संतुष्ट हैं कि उन्हें मुआवजा मिलने का रास्ता साफ हो गया है। प्रशासन की इस पहल से उन गरीब और अनपढ़ ग्रामीणों को सबसे ज्यादा राहत मिली है जो कभी स्कूल नहीं गए और कागजों के अभाव में अपना हक खोने की आशंका से जूझ रहे थे।
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