सत्या राजपूत, रायपुर। छत्तीसगढ़ में डीएड (D.Ed) प्रशिक्षित अभ्यर्थियों का नियुक्ति को लेकर जारी आंदोलन अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है। पिछले 210 दिनों से रायपुर में अनिश्चितकालीन धरना और आमरण अनशन कर रहे अभ्यर्थियों का एक प्रतिनिधिमंडल अब देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचकर अपनी मांगों को राष्ट्रीय मंच पर उठा रहा है। प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के इस्तीफे की मांग करते हुए शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

अभ्यर्थियों का कहना है कि नियुक्ति की मांग को लेकर लगातार शांतिपूर्ण आंदोलन के बावजूद सरकार उनकी समस्याओं की अनदेखी कर रही है। उनका आरोप है कि अदालतों के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, जिससे हजारों प्रशिक्षित युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है।

210 दिनों से सड़कों पर संघर्ष, सरकार पर उपेक्षा का आरोप

डीएड अभ्यर्थियों का कहना है कि वे पिछले सात महीनों से अधिक समय से रायपुर में लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके बावजूद सरकार और शिक्षा विभाग की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई। उनका आरोप है कि सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के आदेशों के बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, जिससे हजारों अभ्यर्थियों को मानसिक, आर्थिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

अभ्यर्थियों ने कहा कि प्रदेश के शिक्षित युवा रोजगार की उम्मीद लेकर वर्षों से तैयारी करते रहे, लेकिन आज उन्हें अपनी ही नियुक्ति के लिए सड़कों पर संघर्ष करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पूरी तरह विफल साबित हुई है।

जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय मुद्दों के साथ जोड़ा आंदोलन

दिल्ली पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने अपने आंदोलन को केवल नियुक्ति तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि देशभर में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों के साथ भी अपनी एकजुटता दिखाई है।

प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर चल रहे राष्ट्रीय आंदोलनों का समर्थन करते हुए कहा कि हाल के समय में नीट परीक्षा से जुड़े विवाद और छात्रों की आत्महत्या जैसी घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं। अभ्यर्थियों ने इन घटनाओं पर दुख व्यक्त करते हुए शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता बताई।

इसके साथ ही प्रतिनिधिमंडल ने सोनम वांगचुक के नेतृत्व में चल रहे जन आंदोलन के प्रति भी समर्थन व्यक्त किया और कहा कि देश के युवाओं को बार-बार अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतरना पड़ रहा है, जो व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाता है।

दोनों शिक्षा मंत्रियों के इस्तीफे की मांग

डीएड अभ्यर्थियों ने अपनी प्रमुख मांगों में केंद्रीय और राज्य दोनों स्तर के शिक्षा मंत्रियों की जवाबदेही तय करने की बात कही है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि देशभर में नीट परीक्षा से जुड़े विवाद, छात्रों की आत्महत्या और शिक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रही खामियों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए।

वहीं, छत्तीसगढ़ में डीएड अभ्यर्थियों की नियुक्ति में लगातार हो रही देरी, न्यायालय के आदेशों के पालन में कथित लापरवाही और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर उन्होंने राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के इस्तीफे की भी मांग की है।

नियुक्ति पत्र जारी करने की मांग

अभ्यर्थियों ने सरकार से मांग की है कि बिना किसी और देरी के न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए सभी पात्र डीएड अभ्यर्थियों को तत्काल नियुक्ति पत्र जारी किए जाएं। उनका कहना है कि लंबे समय से नियुक्ति लंबित रहने के कारण हजारों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

‘यह सिर्फ नियुक्ति नहीं, युवाओं के अधिकारों की लड़ाई’

दिल्ली में मौजूद प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि यह आंदोलन केवल डीएड अभ्यर्थियों की नौकरी का मुद्दा नहीं है, बल्कि देश के उन सभी युवाओं की लड़ाई है जिन्हें लंबे समय से व्यवस्था के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

अभ्यर्थियों ने कहा कि यदि सरकार योग्य युवाओं को समय पर नियुक्ति नहीं दे सकती और शिक्षा व्यवस्था में सुधार सुनिश्चित नहीं कर सकती, तो संबंधित जिम्मेदारों को नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए।

संघर्ष जारी रखने का ऐलान

डीएड अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी नियुक्ति नहीं होती और उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उनका कहना है कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ते रहेंगे और न्याय मिलने तक पीछे नहीं हटेंगे।

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