रायपुर। छत्तीसगढ़ में मनरेगा कर्मचारियों के आंदोलन की आहट तेज हो गई है। HR पॉलिसी, सेवा सुरक्षा और ग्रेड पे सहित लंबित मांगों को लेकर कर्मचारी महासंघ ने 2 जुलाई 2026 से चरणबद्ध हड़ताल का ऐलान किया है। इसे लेकर प्रदेश स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
हड़ताल का बड़ा ऐलान

छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ की रविवार को आयोजित प्रदेश स्तरीय वर्चुअल बैठक (वीसी) में बड़ा निर्णय लिया गया। बैठक में प्रांतीय, संभागीय, जिला एवं ब्लॉक स्तर के पदाधिकारी एवं सक्रिय सदस्य शामिल हुए। बैठक में निर्णय लिया गया कि यदि 1 जुलाई 2026 तक कर्मचारियों की मांगें पूरी नहीं की जातीं, तो 2 जुलाई से प्रदेश के करीब 12,000 कर्मचारी चरणबद्ध हड़ताल पर चले जाएंगे।
तीन चरणों में आंदोलन
महासंघ द्वारा तय आंदोलन कार्यक्रम इस प्रकार है—
2 जुलाई 2026: जनपद (ब्लॉक) स्तर पर हड़ताल व प्रदर्शन
3 जुलाई 2026: जिला स्तर पर रैली व विरोध प्रदर्शन
4 जुलाई 2026: राज्य स्तर पर व्यापक हड़ताल व प्रदर्शन
महासंघ ने 22 जून से ही सभी मंत्रियों, विधायकों एवं संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर आंदोलन की सूचना देना शुरू कर दिया है।
HR पॉलिसी और लंबित मांगें प्रमुख मुद्दा
कर्मचारियों का आरोप है कि ढाई वर्षों से HR पॉलिसी की फाइल लंबित पड़ी है। इसके लिए गठित समिति को 15 दिनों में रिपोर्ट देनी थी, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ। महासंघ का कहना है कि बार-बार ज्ञापन देने के बावजूद ग्राम रोजगार सहायकों को पूर्व की भांति संविदा पर रखने, ग्रेड पे निर्धारण और सेवा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर कार्रवाई नहीं की गई।
“20 वर्षों की सेवा, फिर भी सुरक्षा नहीं” – महासंघ
महासंघ अध्यक्ष अजय क्षत्री ने कहा कि मनरेगा कर्मचारी पिछले लगभग 20 वर्षों से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार गारंटी योजना के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसके बावजूद उनके लिए अब तक कोई स्पष्ट सेवा सुरक्षा एवं सामाजिक सुरक्षा नीति लागू नहीं की गई है, जो कर्मचारियों में असंतोष का कारण बन रही है।
VB-G-RAM-G योजना पर भी असमंजस
बैठक में यह भी कहा गया कि यदि 1 जुलाई 2026 तक “VB-G-RAM-G” योजना के साथ HR पॉलिसी लागू नहीं होती, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। केंद्र सरकार द्वारा 1 जुलाई 2026 से मनरेगा के स्थान पर देशभर में “विकसित भारत-जी राम जी” योजना लागू किए जाने की बात भी चर्चा में रही।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
महासंघ की प्रमुख मांगों में शामिल हैं—
नियमितीकरण की प्रक्रिया
HR पॉलिसी के तहत 62 वर्ष तक सेवा सुरक्षा
स्पष्ट निलंबन एवं स्थानांतरण नीति
अनुकंपा नियुक्ति का प्रावधान
सेवा पुस्तिका संधारण
वार्षिक वेतन वृद्धि
चिकित्सा सुविधा
ग्राम रोजगार सहायकों का संविदाकरण एवं ग्रेड पे निर्धारण

कर्मचारियों ने दी चेतावनी
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समयसीमा में मांगों पर निर्णय नहीं लिया गया, तो 12 हजार से अधिक कर्मचारी बड़े पैमाने पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
अब सभी की नजरें 1 जुलाई 2026 पर टिकी हैं, जब यह तय होगा कि सरकार HR पॉलिसी और अन्य मांगों पर कोई ठोस फैसला लेती है या आंदोलन और तेज होता है।
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