सत्या राजपूत, रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत संविदा कर्मचारी संघ (722) द्वारा नियमितीकरण, रिक्त पदों पर समायोजन और संविलियन की मांग को लेकर शुरू किया गया चरणबद्ध आंदोलन अब अनिश्चितकालीन कामबंद हड़ताल में बदल गया है। कर्मचारियों की हड़ताल का असर प्रदेश के कई हिस्सों में बिजली व्यवस्था पर दिखाई देने लगा है, जिससे आम उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

संघ के अनुसार उनकी प्रमुख मांग पॉवर कंपनी में कार्यरत संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण, रिक्त पदों पर समायोजन और संविलियन है। मांगों के समर्थन में संघ लंबे समय से आंदोलन कर रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।

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चरणबद्ध आंदोलन के तहत शुरू हुआ था विरोध

संघ ने बताया कि आंदोलन के प्रथम चरण के तहत 25 मई 2026 को रायपुर स्थित विद्युत सेवा भवन, डंगनिया के सामने विशाल आमसभा आयोजित की गई थी। इसके बाद भी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होने के कारण दूसरे चरण के रूप में 22 जून 2026 से अनिश्चितकालीन कामबंद आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया गया।

हड़ताल शुरू होने से पहले 22 जून को पॉवर कंपनी प्रबंधन ने संघ को उच्च प्रबंधन के साथ द्विपक्षीय वार्ता के लिए आमंत्रित किया था। हालांकि संघ का आरोप है कि बैठक में उनकी प्रमुख मांगों पर निर्णय लेने में सक्षम अधिकारी उपस्थित नहीं थे, जिसके कारण नियमितीकरण और समायोजन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा ही नहीं हो सकी।

बिजली व्यवस्था प्रभावित, उपभोक्ताओं को हो रही परेशानी

संविदा कर्मचारियों की हड़ताल का असर अब बिजली आपूर्ति पर भी देखने को मिल रहा है। कई क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति बाधित होने और घंटों तक बिजली बंद रहने की शिकायतें सामने आ रही हैं। कर्मचारियों का कहना है कि विद्युत रखरखाव और फील्ड स्तर के अधिकांश कार्यों में संविदा कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है, जिसके कारण उनके कामबंद करने से व्यवस्था प्रभावित होना स्वाभाविक है।

वर्षों से नियमितीकरण की मांग

संघ का कहना है कि पॉवर कंपनी में वर्ष 2007, 2009 और 2011 में संविदा पदों पर भर्ती किए गए कर्मचारियों को क्रमशः दो वर्ष बाद नियमित किया गया था। वहीं वर्ष 2016 और 2018 में भर्ती हुए संविदा कर्मचारी 8 से 10 वर्षों की सेवा पूरी करने की ओर अग्रसर हैं, लेकिन आज भी संविदा व्यवस्था में कार्य करने को मजबूर हैं।

कर्मचारियों का आरोप है कि कंपनी में नियमित कर्मचारियों की भारी कमी है और स्थायी प्रकृति के कार्यों के लिए भी संविदा कर्मचारियों पर निर्भरता बढ़ती जा रही है। इसके बावजूद उन्हें नियमित करने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है।

सुरक्षा और दुर्घटनाओं का भी मुद्दा

संघ ने दावा किया है कि अब तक विद्युत कार्यों के दौरान हुई विभिन्न दुर्घटनाओं में 41 संविदा कर्मचारियों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा कई कर्मचारी स्थायी और अस्थायी रूप से दिव्यांगता का शिकार भी हुए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में काम करने के बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारियों के समान सुविधाएं और सुरक्षा नहीं मिल रही हैं।

मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन

संघ ने स्पष्ट किया है कि जब तक नियमितीकरण, रिक्त पदों पर समायोजन और संविलियन संबंधी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक अनिश्चितकालीन कामबंद आंदोलन जारी रहेगा। वहीं दूसरी ओर बिजली व्यवस्था पर पड़ रहे असर को देखते हुए अब निगाहें राज्य सरकार और पॉवर कंपनी प्रबंधन की अगली पहल पर टिकी हैं।

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