राजेंद्र गेहानी का पहली बार वर्ल्ड पैरा आर्मरेस्टलिंग चैंपियनशिप के लिए हुआ चयन, 60 किलो वर्ग में करेंगे भारत का प्रतिनिधित्व; बोले- ‘देश के लिए मेडल जीतना है, बस वहां तक पहुंचने का मौका मिल जाए’
रायपुर। जिस खिलाड़ी ने अपनी शारीरिक अक्षमता को कभी अपनी राह की बाधा नहीं बनने दिया, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर कई बार छत्तीसगढ़ के लिए गोल्ड मेडल जीते, आज वही खिलाड़ी अपने सबसे बड़े सपने की दहलीज पर आर्थिक मजबूरी से जूझ रहा है। राजधानी रायपुर के पैरा-आर्मरेस्टलर राजेंद्र गेहानी का चयन पहली बार विश्व पैरा आर्मरेस्टलिंग चैंपियनशिप के लिए हुआ है। वे सीपी (सेरेब्रल पाल्सी) कैटेगरी के 60 किलोग्राम वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व करने की तैयारी कर रहे हैं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का तिरंगा लहराने के इस सपने के बीच पैसों की कमी बड़ी चुनौती बन गई है।

राजेंद्र ने वर्षों तक कड़ी मेहनत और लगातार अभ्यास के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। नेशनल चैंपियनशिप में उन्होंने कई बार छत्तीसगढ़ के लिए गोल्ड मेडल हासिल किए। अब उनके सामने अपने करियर का सबसे बड़ा मौका है—विश्व स्तर की प्रतियोगिता में देश का प्रतिनिधित्व करना और भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय पदक जीतना।
राष्ट्रीय स्तर पर चमकाया छत्तीसगढ़ का नाम, अब देश के लिए पदक का सपना
राजेंद्र गेहानी के लिए यह सफर आसान नहीं रहा। सीपी कैटेगरी में खेलने वाले राजेंद्र ने अपनी शारीरिक चुनौतियों के बावजूद खेल को अपनी ताकत बनाया। राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने कई बार गोल्ड मेडल जीतकर छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया।
अब पहली बार उनका चयन विश्व पैरा आर्मरेस्टलिंग चैंपियनशिप के लिए हुआ है। इस प्रतियोगिता का आयोजन अक्टूबर-नवंबर में राजधानी दिल्ली में होने जा रहा है। राजेंद्र इस मौके को अपने लिए ही नहीं, बल्कि देश के लिए भी गौरव का अवसर मानते हैं।
उनका सपना है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का राष्ट्रगान बजे और वे देश के लिए मेडल जीतकर लौटें। लेकिन प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए जरूरी आर्थिक खर्च उनके सामने बड़ी परेशानी बनकर खड़ा हो गया है।
खेल विभाग से लेकर मंत्री कार्यालय तक लगाई गुहार
राजेंद्र का कहना है कि आर्थिक सहायता के लिए उन्होंने खेल विभाग और खेल मंत्री कार्यालय में कई बार संपर्क किया। अपनी स्थिति बताते हुए आवेदन भी सौंपे। इसके बावजूद अब तक उन्हें आर्थिक सहयोग नहीं मिल पाया है।
उनके मुताबिक, कई बार आश्वासन जरूर मिला, लेकिन आर्थिक मदद अब तक नहीं पहुंची। ऐसे में विश्व चैंपियनशिप जैसे बड़े मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलने के बावजूद वे आर्थिक संकट के कारण खुद को बेबस महसूस कर रहे हैं।
‘मैं देश के लिए मेडल जीतना चाहता हूं, बस एक बार वहां पहुंचने का मौका मिले’
अपनी स्थिति बताते हुए राजेंद्र गेहानी भावुक हो जाते हैं। उनका कहना है कि उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ के लिए पूरी मेहनत से मेडल जीते हैं और अब देश के लिए खेलने का मौका मिला है।
राजेंद्र ने कहा, “मैंने सालों-साल पसीना बहाकर नेशनल चैंपियनशिप में छत्तीसगढ़ के लिए गोल्ड मेडल जीते हैं। आज जब मुझे विश्व स्तर पर अपने देश का प्रतिनिधित्व करने और अंतरराष्ट्रीय मेडल जीतने का मौका मिला है, तो पैसों की कमी के कारण लाचार महसूस कर रहा हूं।”
उन्होंने आगे कहा कि सरकार की ओर से सहयोग नहीं मिलने के कारण उनका हौसला टूट रहा है। वे चाहते हैं कि इस मुश्किल समय में उन्हें आर्थिक मदद मिले, ताकि वे प्रतियोगिता में हिस्सा लेने पहुंच सकें।
उनकी सीधी सी अपील है—“मैं देश के लिए मेडल जीतना चाहता हूं, बस मुझे एक बार वहां पहुंचने का मौका मिले। मेरा यह सफर रुकना नहीं चाहिए और देश के लिए मेडल जीतने का मौका मेरे हाथ से नहीं निकलना चाहिए।”
प्रतिभा के सामने आर्थिक मजबूरी, व्यवस्था पर सवाल
राजेंद्र गेहानी की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की आर्थिक परेशानी की कहानी नहीं है। यह उन खिलाड़ियों की चुनौतियों को भी सामने लाती है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचते हैं।
एक तरफ खेल और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने की बात होती है, वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रीय स्तर पर लगातार पदक जीतने वाला खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में जाने के लिए आर्थिक सहायता की उम्मीद लगाए बैठा है। राजेंद्र के सामने अब सवाल सिर्फ प्रतियोगिता में खेलने का नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत से हासिल किए इस मौके को बचाने का है।
अब देखना होगा कि विश्व चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रहे इस पैरा खिलाड़ी की गुहार शासन-प्रशासन तक कब पहुंचती है और क्या उसे वह आर्थिक मदद मिल पाती है, जिसकी उसे अपने देश के लिए खेलने के लिए जरूरत है।
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