अजय सैनी, भिवानी. पीएसीएल, राष्ट्रीय सहारा, किम फ्यूचर विजन, नेक्टर कर्मिशियल, गौपैथी स्वदेशी उद्योग, आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी और सर्वहि हाऊसिंग लिमिटेड सहित विभिन्न चीटफंड व फर्जी क्रेडिट सोसायटियों की ठगी का शिकार हुए देश के करोड़ों जमाकर्ताओं के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया है। शुक्रवार को ठगी पीडि़त जमाकर्ता परिवार (तपजप) के राष्ट्रीय आह्वान पर देशभर से आए हजारों निवेशकों ने दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर जोरदार प्रदर्शन कर अपनी आवाज बुलंद की। इसी कड़ी में भिवानी जिले से भी भारी संख्या में पीडि़त निवेशक दिल्ली पहुंचे, जिसका नेतृत्व तपजप के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष रामजस ने किया। दिल्ली रवाना होने से पूर्व और प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने संयुक्त बयान जारी कर सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जताई।

तपजप के प्रदेश अध्यक्ष रामजस, भिवानी जिला अध्यक्ष रमेश तंवर तथा राजेश बडाला ने कहा कि वर्ष 2019 में देश की संसद ने सर्वसम्मति से अनियमित जमा योजनाएं पाबंदी अधिनियम 2019 (बड्स एक्ट-2019) पास किया था। इस कानून में स्पष्ट प्रावधान और कानूनी गारंटी है कि ठगी पीडि़त परिवारों को उनकी जमा राशि का दो से तीन गुना तक भुगतान मात्र 180 दिनों के भीतर किया जाएगा। हालांकि, इस टाइम-बाउंड कानून को लागू हुए 7 साल होने को आए हैं, लेकिन केंद्र व राज्य सरकारों की उदासीनता के कारण किसी भी पीडि़त को एक फूटी कौड़ी तक वापस नहीं मिली है। यह देश के करोड़ों गरीब जमाकर्ताओं के साथ क्रूर मजाक और सीधे तौर पर कानून का खुला उल्लंघन है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और स्थानीय प्रशासन पीडि़तों को न्याय दिलाने के बजाए केवल कागजी औपचारिकताओं और आश्वासनों में उलझाकर भटकाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी मांगों में देश के हर जिले और तहसील स्तर पर तुरंत प्रभाव से भुगतान पटल (रिफंड काउंटर) स्थापित किए जाएं। जिला प्रशासन स्वयं बड्स एक्ट-2019 के कानूनी प्रावधानों को लागू करते हुए पीडि़तों की मूल राशि, ब्याज और मैच्योरिटी रकम का तुरंत भुगतान सुनिश्चित करे। आरोपी चीटफंड कंपनियों की संपत्तियों को तेजी से नीलाम कर जमाकर्ताओं के पैसे लौटाए जाएं।

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने बड्स एक्ट-2019 के तहत पीडि़तों की गाढ़ी कमाई तुरंत वापस कराने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और अधिक उग्र रूप धारण करेगा। इस अवसर पर पवन कुमार सिरसा घोघड़ा, बलबीर, कृष्ण, सुरेश कुमार, वजीर, मुकेश, उमेद रानिला, राजबीर, हरीश कुमार, सतपाल फौजी, सूबे सिंह, विजय रोहिल्ला, सुरेश अलखपुरा, सुखबीर सिंह, शीला देवी, गुड्डी सहित अन्य पीडि़त निवेशक मौजूद रहे।