सत्या राजपूत, रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ ने जिला बेमेतरा के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के खिलाफ सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों और महिला कर्मचारियों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों पर अब तक प्रभावी प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होने से नाराज हैं। इसके विरोध में कल बेमेतरा कलेक्टर कार्यालय का शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से घेराव करने का निर्णय लिया है।

संघ का कहना है कि इस संबंध में पूर्व में जिला प्रशासन एवं शासन के समक्ष विस्तृत शिकायत एवं ज्ञापन प्रस्तुत किया जा चुका है। शिकायतों में कर्मचारियों की गरिमा, महिला सुरक्षा, कार्यस्थल के वातावरण, निर्धारित कार्य दायित्व, वेतन, CHO के साथ कथित भेदभाव तथा आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के नियमित संचालन से जुड़े अनेक गंभीर विषय उठाए गए हैं। बावजूद इसके अपेक्षित समय में ठोस एवं प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण कर्मचारियों में आक्रोश व्याप्त है।

महिला कर्मचारियों से संबंधित गंभीर शिकायतें

संघ के अनुसार, शिकायतकर्ताओं ने समीक्षा बैठकों के दौरान महिला कर्मचारियों के प्रति कथित रूप से आपत्तिजनक एवं अशोभनीय टिप्पणियां किए जाने, अभद्र भाषा के प्रयोग, लेजर लाइट डालकर असहज किए जाने तथा बिना अनुमति स्पर्श अथवा अनुचित तरीके से पास बुलाए जाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

संघ ने स्पष्ट किया है कि ये सभी शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोप हैं और इनकी सत्यता का अंतिम निर्धारण निष्पक्ष जांच के माध्यम से ही होना चाहिए। इसी कारण संघ की प्रमुख मांग है कि महिला कर्मचारियों से संबंधित शिकायतों की जांच कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013 (POSH Act) के प्रावधानों के अनुरूप सक्षम समिति या प्राधिकरण से कराई जाए।

CHO संवर्ग को कथित रूप से सार्वजनिक रूप से अपमानित करने का आरोप

संघ के अनुसार, शिकायतों में CHO की योग्यता एवं पद का सार्वजनिक रूप से उपहास करने, अन्य संवर्गों से अपमानजनक तुलना करने तथा समीक्षा बैठकों में केवल CHO संवर्ग को लक्ष्य बनाकर कार्यों एवं कमियों के लिए जिम्मेदार ठहराने के आरोप भी शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त CR/APAR खराब करने, नौकरी समाप्त कराने, FIR कराने अथवा अन्य प्रकार की कार्रवाई की धमकी दिए जाने तथा कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों को लक्षित किए जाने की आशंका संबंधी शिकायतें भी सामने आई हैं।

NHM के TOR के विपरीत कार्य लेने का आरोप

संघ ने आरोप लगाया है कि NHM द्वारा निर्धारित Community Health Officer (CHO) Terms of Reference (TOR) के बावजूद CHO से अन्य संवर्गों के कार्यों सहित ऐसे कार्यों का दायित्व भी लिया जा रहा है, जो निर्धारित कार्य-विभाजन के अनुरूप नहीं हैं।

विशेष रूप से संस्थागत प्रसव, विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों तथा अन्य विभागीय गतिविधियों के संबंध में CHO पर अत्यधिक दबाव बनाए जाने की शिकायत है।

संघ की मांग है कि CHO, ANM, MPW, RHO एवं अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों से उनके निर्धारित TOR एवं विभागीय दायित्व के अनुसार ही कार्य लिया जाए तथा किसी एक संवर्ग पर सामूहिक दायित्व का अनुचित भार न डाला जाए।

आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के बंद होने से जनता को हो रही परेशानी का मुद्दा भी प्रमुख

संघ ने इस आंदोलन को केवल कर्मचारी हित का विषय न बताते हुए इसे ग्रामीण जनता की स्वास्थ्य सेवाओं से भी सीधे जुड़ा हुआ विषय बताया है।

संघ के अनुसार जिले में सेक्टर समीक्षा बैठकों में CHO एवं RHO की उपस्थिति अनिवार्य किए जाने तथा वेक्टर जनित रोग नियंत्रण गतिविधियों, हेल्थ मेला, विशेष अभियानों, फील्ड विजिट, घर-घर सर्वेक्षण एवं अन्य गतिविधियों में एकल पदस्थ CHO को भेजे जाने के कारण कुछ आयुष्मान आरोग्य मंदिरों/उप-स्वास्थ्य केंद्रों के नियमित संचालन में बाधा उत्पन्न होती है।

यदि किसी संस्था में केवल एक CHO पदस्थ है और उसे बैठक अथवा फील्ड गतिविधि के लिए बाहर भेजा जाता है, तो उसके अनुपस्थित रहने की अवधि में संस्था की नियमित सेवाएँ प्रभावित होने की संभावना रहती है।

इससे OPD, दवा वितरण, NCD स्क्रीनिंग, स्वास्थ्य परामर्श, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा अन्य प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

संघ की मांग है कि किसी भी समीक्षा बैठक या फील्ड गतिविधि के कारण आयुष्मान आरोग्य मंदिर की नियमित स्वास्थ्य सेवाएँ बाधित न हों, इसके लिए वैकल्पिक मानव संसाधन एवं ड्यूटी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

वेतन रोकने एवं मुख्यालय निवास के संबंध में भी शिकायत

संघ ने यह भी कहा है कि मुख्यालय निवास के संबंध में पूर्व आदेशों के विपरीत मौखिक दबाव बनाए जाने, सेवा समाप्ति अथवा अन्य कार्रवाई की धमकी देने तथा कुछ मामलों में वेतन रोके जाने की शिकायतें प्राप्त हुई हैं।

संघ की मांग है कि जिन कर्मचारियों का वेतन बिना स्पष्ट एवं विधिसम्मत प्रक्रिया के रोका गया है, उनके प्रकरणों की जांच कर लंबित वेतन तत्काल जारी किया जाए।

संघ की प्रमुख मांगें

आंदोलन के माध्यम से संघ मुख्य रूप से निम्न मांगें शासन एवं प्रशासन के समक्ष रखेगा—

  1. CMHO बेमेतरा के विरुद्ध तत्काल उच्च स्तरीय, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच समिति गठित की जाए।
  2. जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने हेतु जांच अवधि में CMHO बेमेतरा को वर्तमान पद से हटाकर अन्यत्र पदस्थ किया जाए अथवा उपयुक्त प्रशासनिक व्यवस्था की जाए।
  3. महिला कर्मचारियों से संबंधित शिकायतों की जांच POSH Act, 2013 के अनुसार कराई जाए।
  4. बिना विधिसम्मत प्रक्रिया के रोके गए वेतन की जांच कर लंबित वेतन जारी किया जाए।
  5. CHO से NHM के निर्धारित TOR के अनुरूप ही कार्य लिया जाए।
  6. एकल पदस्थ CHO वाले आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में नियमित स्वास्थ्य सेवाएँ बाधित न हों, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
  7. सभी संवर्गों से उनके निर्धारित दायित्वों के अनुसार समान एवं निष्पक्ष रूप से कार्य लिया जाए।
  8. जांच में आरोप सत्य पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध लागू सेवा नियमों के तहत विधिसम्मत विभागीय कार्रवाई की जाए।
  9. शिकायतकर्ता कर्मचारियों एवं संघ पदाधिकारियों के विरुद्ध किसी भी प्रकार की प्रतिशोधात्मक कार्रवाई न की जाए। लोकतांत्रिक तरीके से आवाज बुलंद करने की अपील

संघ के प्रदेश नेतृत्व ने प्रदेश के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों एवं अन्य संविदा कर्मचारियों से 18 अगस्त को बेमेतरा पहुंचकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करने की अपील की है। संघ ने कहा है कि आंदोलन का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाना नहीं है, बल्कि कर्मचारियों की गरिमा, महिला सुरक्षा, निष्पक्ष प्रशासन, निर्धारित कार्य दायित्व एवं जनता को निर्बाध स्वास्थ्य सेवा के लिए आवाज उठाना है।

संघ ने प्रशासन से भी अपील की है कि आंदोलन को शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से संपन्न कराने के लिए आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा कर्मचारियों की मांगों को गंभीरता से सुना जाए।

दो सप्ताह का समय, अन्यथा प्रदेश स्तरीय ‘काम बंद–कलम बंद’ आंदोलन

संघ ने स्पष्ट किया है कि 18 अगस्त के बेमेतरा कलेक्टर कार्यालय घेराव के बाद भी यदि आगामी 02 सप्ताह के भीतर CMHO बेमेतरा को वर्तमान पद से हटाने/अन्यत्र पदस्थ करने, उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच प्रारंभ करने तथा महिला कर्मचारियों की शिकायतों पर नियमानुसार कार्रवाई करने की दिशा में ठोस निर्णय नहीं लिया जाता है, तो संघ प्रदेश स्तर पर व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होगा।

इसके अगले चरण में संघ द्वारा विधिसम्मत एवं शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक तरीके से प्रदेश स्तरीय “काम बंद–कलम बंद” आंदोलन, धरना-प्रदर्शन एवं चरणबद्ध आंदोलनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जाने का निर्णय लिया जा सकता है।

संघ ने कहा कि वह प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को प्रभावित करना नहीं चाहता, लेकिन यदि कर्मचारियों की गंभीर शिकायतों पर लगातार प्रशासनिक उदासीनता बनी रहती है तो लोकतांत्रिक आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।

प्रशासन से टकराव नहीं, न्याय चाहते हैं- संघ

छत्तीसगढ़ प्रदेश सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ के प्रदेश नेतृत्व ने कहा कि संघ शासन एवं प्रशासन से टकराव नहीं चाहता। संघ की अपेक्षा केवल इतनी है कि गंभीर शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो, दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई हो और निर्दोष पाए जाने पर संबंधित अधिकारी को भी निष्पक्ष जांच के माध्यम से क्लीन चिट मिले।

संघ ने माननीय स्वास्थ्य मंत्री एवं राज्य शासन से अपील की है कि प्रकरण में तत्काल व्यक्तिगत संज्ञान लेकर उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए जाएं तथा जांच की निष्पक्षता के लिए आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाए जाएं।

संघ ने कहा, “महिला सम्मान से समझौता नहीं, कर्मचारियों की गरिमा से समझौता नहीं और जनता की स्वास्थ्य सेवाओं से समझौता नहीं।”

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