चंडीगढ़। पंजाब सरकार द्वारा आरटीओ को फेसलेस करना केवल एक प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत और प्रतीकात्मक संदेश है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने लुधियाना में आरटीओ दफ्तर के एक कमरे पर ताला लगाकर और उसकी चाबी कूड़ेदान में फेंककर यह साफ कर दिया कि अब पुराने तरीकों की कोई जगह नहीं है।
आरटीओ लंबे समय से रिश्वतखोरी और दलाली का पर्याय बना हुआ था। ड्राइविंग लाइसेंस, आरसी, वाहन ट्रांसफर जैसे कामों के लिए आम लोगों को दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे। अब करीब 56 सेवाएं पूरी तरह फेसलेस कर दी गई हैं, जिससे व्यक्ति और अधिकारी के बीच सीधा संपर्क लगभग खत्म हो गया है।
इस योजना के लागू होने से ट्रांसपोर्ट विभाग की सभी सेवाएं सेवा केंद्रों के माध्यम से मिलेंगी। नागरिक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे या 1076 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके घर बैठे सुविधा ले सकेंगे। कर्मचारी स्वयं घर जाकर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करेंगे। आरटीओ दफ्तर केवल ड्राइविंग लाइसेंस की फोटो और आरसी रिन्यू जैसे सीमित कार्यों के लिए ही जाना होगा।

इस फैसले का सबसे बड़ा असर यह होगा कि रिश्वत मांगने और देने की संभावनाएं लगभग खत्म हो जाएंगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि तय समय पर काम न होने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी। यह कदम जनता में भरोसा बहाल करने और सरकारी सिस्टम को पारदर्शी बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
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