चंडीगढ़. पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के दूसरे दिन मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सतलुज-यमुना लिंक (SYL), भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB), और इंडस जल संधि जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात रखी। पानी के बंटवारे को लेकर चल रही बहस में सीएम मान ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले 40-45 सालों में पानी का सही प्रबंधन नहीं किया गया। उन्होंने कहा, “पानी के लिए गांवों में हत्याएं हो जाती हैं। हमारे पास पानी है ही नहीं, तो हम नहरें कैसे दे दें?”
BBMB और SYL पर चर्चा
मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल ही में दिल्ली में SYL को लेकर बैठक हुई थी, जिसमें सभी दलों ने सहमति जताई थी। उन्होंने रिपेरियन सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि हर 25 साल में पानी की समीक्षा होनी चाहिए, लेकिन पिछले सरकारों ने इसकी अनदेखी की। मान ने कहा, “पिछले समय में पानी की मात्रा और अब की स्थिति की समीक्षा नहीं हुई।”
इंडस जल संधि का जिक्र करते हुए सीएम मान ने कहा कि प्रधानमंत्री ने इसे रद्द कर दिया है। उन्होंने बताया कि पंजाब में चिनाब, रावी, उझ, और कश्मीर नदी का पानी पौंग डैम, रणजीत सागर डैम, और भाखड़ा डैम में आ सकता है। हालांकि, उन्होंने जोर दिया कि रिपेरियन सिद्धांत के तहत पंजाब का पहला हक है।

सिंचाई में सुधार का दावा
सीएम मान ने दावा किया कि उनकी सरकार ने नहरी पानी से सिंचाई को 21% से बढ़ाकर 63% कर दिया है और यह आगे भी बढ़ेगा। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा, “आजादी के बाद 60 साल तक इनका राज रहा, लेकिन इन्हें पानी का महत्व नहीं पता था।
हरियाणा पर पानी के अति-उपयोग का आरोप
मुख्यमंत्री ने हरियाणा पर पानी के अति-उपयोग का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हरियाणा ने 31 मार्च तक अपने हिस्से का पानी इस्तेमाल कर लिया और अब अतिरिक्त पानी की मांग कर रहा है। मान ने कहा, “हम छह महीने से लगातार पत्र लिख रहे हैं कि हरियाणा ज्यादा पानी इस्तेमाल कर रहा है।
केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए मान ने कहा कि इंडस जल संधि को रद्द करने का फैसला ट्रंप के कहने पर न हो। उन्होंने कहा कि पंजाब को इसका पानी मिलना चाहिए। SYL नहर के लिए जमीन अधिग्रहण पर उन्होंने कहा, “नहरें एक या दो निकाल लो, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उसमें से बकरी भी पानी न पी सके। हर 100-200 मीटर पर मोघा होना चाहिए ताकि पंजाब को भी पानी मिले।
विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए सीएम मान ने कहा कि उनकी सरकार ने पानी के मुद्दे पर ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने विपक्ष से पूछा, “40-45 साल बाद पानी आया, तब आप कहां थे?” मुख्यमंत्री ने पानी के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह पंजाब के लिए जीवन रेखा है और इसे बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा।
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