गांधीनगर। 13 सितंबर 2026 को गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के सुशासन के सफलतापूर्वक पांच वर्ष पूरे हो गए हैं। इन पांच वर्षों के कार्यकाल में राज्य ने आर्थिक, औद्योगिक, सामाजिक और प्रशासनिक क्षेत्रों में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। 4.08 लाख करोड़ रुपये का ऐतिहासिक बजट पेश करने के साथ ही गुजरात ने ‘विकसित गुजरात @2047’ का रोडमैप तैयार कर भविष्य की मजबूत नींव रख दी है।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार ने सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) और हरित हाइड्रोजन जैसे अत्याधुनिक और रणनीतिक क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है। इन पांच वर्षों में गुजरात केवल नीतिगत बदलावों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी औद्योगिक और तकनीकी साख को भी नए आयाम दिए हैं।
औद्योगिक क्रांति: 19 नई नीतियां और सेमीकंडक्टर हब
राज्य में निवेश और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए बीते पांच वर्षों के दौरान 19 महत्वपूर्ण नीतियां लागू की गईं। इनमें सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन, SpaceTech, डेटा सेंटर, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसी भविष्य उन्मुख नीतियां शामिल हैं। गुजरात देश का ऐसा पहला राज्य बनकर उभरा है जहां 6 सेमीकंडक्टर प्लांट को स्वीकृति मिल चुकी है और इनमें से 3 प्लांट में व्यावसायिक उत्पादन (कमर्शियल प्रोडक्शन) भी शुरू हो चुका है।
इसके अलावा, क्षेत्रीय स्तर पर संतुलित विकास सुनिश्चित करने के लिए 4 वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस (VGRC) आयोजित की गईं, जिनमें कुल 17.4 लाख करोड़ रुपये के एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
प्रशासनिक सुधार और गवर्नेंस 2.0
सुशासन को आम जनता तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ने ‘सुगम डिजिटल गुजरात’ पहल के जरिए नागरिक सेवाओं को पेपरलेस, कैशलेस और फेसलेस बनाया। प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए नीति आयोग की तर्ज पर ‘गुजरात राज्य इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मेशन’ (GRIT) और गुजरात प्रशासनिक सुधार आयोग (GARC) का गठन किया गया है। इसके अतिरिक्त, राज्य में सामाजिक न्याय और समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पारित किया गया।
शहरी विकास और ‘विकसित गुजरात @2047’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत @2047’ के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए गुजरात रोडमैप तैयार करने वाला देश का पहला राज्य बना। शहरी आबादी की जरूरतों और सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2025 को ‘शहरी विकास वर्ष’ के रूप में मनाया गया, जिसके तहत विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) और ‘ईज ऑफ लिविंग’ पर ध्यान केंद्रित किया गया।
जनकल्याणकारी योजनाएं और राजस्व सुधार
युवाओं, महिलाओं और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं:
- शिक्षा: छात्राओं की माध्यमिक शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘नमो लक्ष्मी योजना’ और 11वीं-12वीं में विज्ञान विषय को बढ़ावा देने के लिए ‘नमो सरस्वती विज्ञान साधना योजना’।
- स्वास्थ्य एवं पोषण: प्राथमिक विद्यालयों में पौष्टिक नाश्ते के लिए ‘मुख्यमंत्री पौष्टिक अल्पाहार योजना’ और गर्भवती माताओं के स्वास्थ्य सुधार के लिए ‘नमो श्री योजना’।
- राजस्व प्रक्रिया: राजस्व से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रियाओं का सरलीकरण कर आम नागरिकों को सीधे राहत पहुंचाई गई है।
पांच वर्षों का यह सफर दर्शाता है कि गुजरात अब पारंपरिक विनिर्माण के साथ-साथ ज्ञान और तकनीक आधारित अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
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