सोहराब आलम/ मोतिहारी। विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच परसौनी से बोकाने को जोड़ने वाली मुख्य सड़क और नवनिर्मित पुलिया निर्माण कार्य की कलई खुल गई है। मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना के तहत बनी यह सड़क उद्घाटन के महज दो महीने के भीतर ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। निर्माण कार्य इतना घटिया था कि सड़क के बीचो-बीच गहरी दरारें पड़ गई हैं और पुलिया पूरी तरह से भरभरा कर टूट चुकी है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
निर्माण में बरती गई भारी अनियमितता
प्राप्त जानकारी के अनुसार शिव मंदिर से रामपुर मनोरथ तक लगभग 1.8 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण चन्द्रा विभा कन्स्ट्रक्शन नामक एजेंसी द्वारा किया गया था। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के दौरान मानक का रत्ती भर भी पालन नहीं किया गया। मज़बूत सरिया और गुणवत्तापूर्ण सीमेंट के बजाय बालू और घटिया ईंटों का उपयोग करके खानापूर्ति की गई। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सरकारी धन की सीधी लूट है।
गायब है बजट की जानकारी, पारदर्शिता पर सवाल
हैरानी की बात यह है कि निर्माण स्थल पर लगे सरकारी सूचना बोर्ड से प्राक्कलित राशि (बजट) का ब्योरा ही गायब है। किसी भी सरकारी परियोजना में बजट और समय-सीमा का उल्लेख अनिवार्य होता है लेकिन इस बोर्ड ने पारदर्शिता के सभी दावों को खोखला साबित कर दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर विभाग किससे क्या छिपाने की कोशिश कर रहा है?
अधिकारियों का बेतुका तर्क और जनता का आक्रोश
जब इस संदर्भ में विभागीय अधिकारियों से सवाल पूछा गया, तो उनका जवाब और भी चौंकाने वाला था। अधिकारियों ने पल्ला झाड़ते हुए दावा किया कि पुलिया मनरेगा के तहत पुरानी बनी थी हमने सिर्फ मरम्मत की थी जो भारी वाहनों के दबाव के कारण टूट गई।
अब सवाल यह है कि यदि पुलिया जर्जर थी, तो बिना उसकी लोड-कैपेसिटी जांचे उस पर नई सड़क कैसे पास की गई? यह तर्क विभाग की संवेदनहीनता को दर्शाता है।
उच्च स्तरीय जांच की मांग
सड़क और पुलिया के क्षतिग्रस्त होने से राहगीरों के लिए बड़े हादसे का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी और ग्रामीण कार्य विभाग के मुख्य अभियंता को पत्र लिखकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और ठेकेदार के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क का पुनर्निर्माण नहीं हुआ, तो वे सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन इस भ्रष्टाचार पर क्या कदम उठाता है।

