BRICS को लेकर वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम के सवालों के बाद सियासी विवाद बढ़ गया है। चिदंबरम ने पूछा था कि पिछले कुछ BRICS सम्मेलनों से भारत को आखिर क्या ठोस फायदा मिला। उनके बयान पर बीजेपी ने तंज कसते हुए उन्हें ‘नाराज फूफा’ तक कह दिया। विवाद बढ़ने के बाद अब कांग्रेस ने BRICS को लेकर अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट कर दिया है।

कांग्रेस ने BRICS को बताया महत्वपूर्ण मंच

कांग्रेस ने एक पत्र जारी कर कहा कि वह BRICS का स्वागत करती है और भारत को इस मंच का इस्तेमाल एक न्यायसंगत और संतुलित वैश्विक व्यवस्था के निर्माण के लिए करना चाहिए। पार्टी के मुताबिक भारत को अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए BRICS में नैतिक नेतृत्व और रणनीतिक स्पष्टता प्रदान करनी चाहिए।

कांग्रेस ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की विदेश नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में भारत ने इसी तरह BRICS के भीतर अपनी भूमिका निभाई थी।

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‘ग्लोबल साउथ की आवाज बने भारत’

कांग्रेस ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लंबे समय से भारत को ‘ग्लोबल साउथ की आवाज’ बनाने की बात करते रहे हैं। पार्टी का कहना है कि केवल एकजुटता की घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि उन्हें ठोस और प्रभावी कार्रवाई से जोड़ना जरूरी है।

मोदी सरकार को कांग्रेस की नसीहत

कांग्रेस ने सरकार से BRICS में भारत की कूटनीतिक भूमिका और प्रभाव को मजबूत करने की अपील की। पार्टी ने ईरान, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और BRICS के संस्थापक सदस्य दक्षिण अफ्रीका से जुड़े मुद्दों पर भारत की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए।

कांग्रेस के मुताबिक भारत को ऐसा देश बनकर दिखाना चाहिए जो अपने राष्ट्रीय हितों को मजबूती से आगे बढ़ाए, लेकिन साथ ही ग्लोबल साउथ के देशों के साथ खड़ा रहे और ग्लोबल नॉर्थ व ग्लोबल साउथ के बीच विश्वसनीय पुल की भूमिका निभाए।

चिदंबरम ने क्या कहा था?

पी. चिदंबरम ने कहा था कि उन्हें पिछले दो-तीन BRICS सम्मेलनों से भारत को कोई ठोस फायदा या वास्तविक नतीजा नजर नहीं आया। उन्होंने QUAD का उदाहरण देते हुए भी पूछा था कि इन मंचों से भारत को आखिर क्या हासिल हुआ। इसी बयान के बाद कांग्रेस को BRICS पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी।

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