कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा कांग्रेस के नवनियुक्त प्रदेश प्रभारी संजय दत्त ने तीन दिवसीय मैराथन बैठकों के बाद पार्टी की आगामी राजनीतिक रणनीति के स्पष्ट संकेत दे दिए हैं। विधायकों, वरिष्ठ नेताओं और संगठन के पदाधिकारियों के साथ लगातार चली बैठकों के बाद उनका फोकस केवल भाजपा सरकार को घेरने तक सीमित नहीं दिखा, बल्कि संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और जनता से सीधा संवाद बढ़ाने पर भी रहा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संदेश 2029 के विधानसभा चुनाव की लंबी तैयारी की शुरुआत माना जा सकता है।
बैठकों के बाद जारी अपने संदेश में संजय दत्त ने कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों और भाजपा सरकार की नीतियों से प्रदेश में जनअसंतोष बढ़ रहा है। किसानों, युवाओं, महिलाओं, कर्मचारियों, मजदूरों और बढ़ती बेरोजगारी व महंगाई जैसे मुद्दों पर कांग्रेस पूरी मजबूती से जनता की आवाज उठाएगी। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी का लक्ष्य केवल सरकार की आलोचना करना नहीं, बल्कि जनहित के मुद्दों को लेकर गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचना भी है।
सूत्रों के अनुसार बैठकों में संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने पर विशेष चर्चा हुई। प्रदेश प्रभारी ने नेताओं और विधायकों से कहा कि राजनीतिक लड़ाई केवल सोशल मीडिया या प्रेस कॉन्फ्रेंस से नहीं जीती जा सकती। इसके लिए कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर पर सक्रिय करना होगा और जनता के बीच लगातार मौजूद रहना होगा। यही वजह है कि जनसंपर्क अभियान को और प्रभावी बनाने की रणनीति पर भी विस्तार से विचार किया गया।
बैठकों में एक और महत्वपूर्ण संदेश संगठनात्मक एकजुटता को लेकर रहा। पिछले कुछ समय से हरियाणा कांग्रेस में गुटबाजी को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में संजय दत्त ने अपने संदेश में कहीं भी किसी गुट या नेता विशेष का उल्लेख नहीं किया, बल्कि पूरे संगठन को एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया। राजनीतिक जानकार इसे एक सोची-समझी रणनीति मान रहे हैं, ताकि पार्टी के भीतर किसी नए विवाद को हवा न मिले और संगठन एक साझा लक्ष्य के साथ आगे बढ़े।
कांग्रेस की रणनीति का दूसरा बड़ा पहलू भाजपा सरकार को जनहित के मुद्दों पर लगातार घेरना है। पार्टी का मानना है कि बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्याएं, महिलाओं की सुरक्षा और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दे ऐसे विषय हैं, जिन पर सरकार को लगातार कटघरे में खड़ा किया जा सकता है। इसी वजह से विधायकों को भी अपने-अपने क्षेत्रों में अधिक सक्रिय रहने और स्थानीय मुद्दों को मजबूती से उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो संजय दत्त फिलहाल किसी बड़े संगठनात्मक फेरबदल के बजाय माहौल को समझने और सभी गुटों को साथ लेकर चलने की नीति पर काम करते नजर आ रहे हैं। हरियाणा की राजनीति में अलग-अलग शक्ति केंद्रों के बीच संतुलन बनाए रखना उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी। ऐसे में शुरुआती दौर में उन्होंने टकराव के बजाय संवाद, संगठन और जनसंपर्क को प्राथमिकता देकर यह संकेत दिया है कि कांग्रेस फिलहाल आंतरिक खींचतान से ज्यादा जनता के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने पर ध्यान देना चाहती है।
हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि आने वाले महीनों में संगठनात्मक सक्रियता अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंची या गुटबाजी फिर से खुलकर सामने आई, तो प्रदेश प्रभारी को कड़े फैसले भी लेने पड़ सकते हैं। फिलहाल उनके संदेश से इतना जरूर स्पष्ट हो गया है कि हरियाणा कांग्रेस की अगली राजनीतिक लड़ाई का केंद्र संगठन की मजबूती, बूथ स्तर तक विस्तार और जनता के मुद्दों पर निरंतर संघर्ष होगा। यही रणनीति आगामी चुनावों से पहले पार्टी की दिशा और दशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

