शिखिल ब्यौहार, भोपाल। मध्य प्रदेश के मंत्री के बयान से प्रदेश में नया सियासी घमासान मच गया है। कांग्रेस ने कैलाश विजयवर्गीय के ‘अधिकारियों में खुद को संघ का स्वयंसेवक बताने की होड़’ वाले बयान पर कांग्रेस ने तंज कसा है।
पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा, ‘मध्य प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का सार्वजनिक बयान अत्यंत गंभीर संवैधानिक प्रश्न खड़ा कर रहा है। उनके अनुसार सरकार बनने के बाद अधिकारी स्वयं को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ा हुआ बताने लगे हैं। यदि प्रशासनिक तंत्र में इस प्रकार की पहचान का चलन बढ़ा है, तो यह केवल राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था की निष्पक्षता, तटस्थता और संवैधानिक मर्यादा से जुड़ा गहरा और गंभीर विषय है।
भारत का संविधान यह अपेक्षा करता है कि शासन का प्रत्येक अधिकारी संविधान के प्रति निष्ठावान हो, किसी राजनीतिक या वैचारिक संगठन के प्रति नहीं। इसलिए, इस कथन की संवैधानिक समीक्षा आवश्यक है। माननीय गवर्नर, महामहिम राष्ट्रपति, आपसे विनम्र आग्रह है, कृपया इस बयान का संज्ञान लें और मप्र सरकार से तुरंत पूछें कि क्या Kailash Vijayvargiya जी के कथन से मध्य प्रदेश सरकार भी सहमत है?
विजयवर्गीय के बयान को PC शर्मा ने बताया सही
कैलाश विजयवर्गीय के बयान का पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक तंत्र में RSS के अफसरों का बोलबाला है यह कमलनाथ, राहुल गांधी, दिग्विजय सिंह ने हमेशा कहा है। आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद ऐसी संस्थाएं हैं जिनके रजिस्ट्रेशन नहीं है, कोई जवाब दे ही नहीं रहा है। इनका उद्देश्य सिर्फ सत्ता और पैसा है। यही बात कैलाश विजयवर्गीय ने भी स्वीकार कर ली है। सही कहा, मध्य प्रदेश का प्रशासन पूरी तरह भ्रष्ट हो गया है। RSS की बात में अधिकारी हां में हां मिलाते हैं। इसका सबूत राम मंदिर मामला भी है। चंपत राय और मिश्रा आखिर कौन है? यह सब विश्व हिंदू परिषद के ही हैं। जितने भी भ्रष्ट अधिकारी वह RSS में घुसे हुए हैं।
BJP ने बचाव में कही ये बात
मामले पर बीजेपी नेता डॉ हितेश बाजपेयी ने कहा, कैलाश विजयवर्गीय के बयान को समझना होगा। जब लंबे समय में संगठन में सरकार रहती है तो कई अवसरवादी लोग आ जाते हैं। तब वैचारिक समूह के लिए वह चुनौती बन जाते हैं क्योंकि वह बनावटी होते हैं। सरकार में 20 साल से ज्यादा हो गए हैं। हमारी सबसे बड़ी चुनौती है कि जो बिना विचार आधार के ही अवसर के लिए आ जाते हैं, कैलाश विजयवर्गीय ने इसी तरफ इशारा किया है। हम लोग भी सजा के चुनौती को लेकर सजग भी हैं।
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