जींद में डॉ. बीआर अंबेडकर लाइब्रेरी का नाम बदलकर अटल लाइब्रेरी करने पर कांग्रेस ने तीखा विरोध जताया है। सांसद कुमारी शैलजा ने इसे सरकार की ओछी राजनीति करार दिया।

जींद। डॉ. बीआर अंबेडकर लाइब्रेरी का नाम बदलकर अटल लाइब्रेरी करने के सरकारी फैसले के खिलाफ शुक्रवार को जोरदार विरोध प्रदर्शन हुआ। इस प्रदर्शन में स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं और अनुसूचित जाति समाज के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर अपना रोष व्यक्त किया। रानी तालाब स्थित बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के सामने आयोजित इस कार्यक्रम में सिरसा से सांसद कुमारी शैलजा मुख्य रूप से शामिल हुईं। उन्होंने प्रदेश सरकार के इस निर्णय को जन भावनाओं के विरुद्ध बताया और इसकी तीखी आलोचना की। सांसद शैलजा ने स्पष्ट किया कि महापुरुषों के नाम पर चल रहे संस्थानों का नाम बदलना सरकार की संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है, जिसे जनता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी।

अंबेडकर लाइब्रेरी नाम बदलने पर आक्रोश

मीडिया से बातचीत करते हुए सांसद कुमारी शैलजा ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम से संचालित पुस्तकालय का नाम बदलना करोड़ों लोगों की भावनाओं को आहत करने वाला कदम है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि केवल नए फ्लेक्स बोर्ड लगाने से इतिहास में दर्ज बाबा साहब के योगदान को मिटाया नहीं जा सकता है। शैलजा ने मांग की कि सरकार को तुरंत इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए और पुस्तकालय का नाम वापस भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर पुस्तकालय कर देना चाहिए। उन्होंने सरकार को नसीहत दी कि यदि वे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को सम्मान देना चाहते हैं, तो नए विकास कार्य करें। पुरानी संस्थाओं का नाम बदलना सरकार की नाकामियों को छिपाने की कोशिश है।

बेरोजगारी और नाम बदलने की राजनीति

सांसद कुमारी शैलजा ने केवल लाइब्रेरी का नाम बदलने तक सीमित नहीं रहकर सरकार को बेरोजगारी और पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों पर भी घेरा। उन्होंने कहा कि आज का युवा बेरोजगारी और प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रही धांधली से बुरी तरह परेशान है, लेकिन सरकार इन समस्याओं का समाधान करने के बजाय नाम बदलने की राजनीति में व्यस्त है। इसके अलावा, उन्होंने हरियाणा की बिगड़ती कानून व्यवस्था पर भी चिंता जताई और इसे राज्य के लिए बड़ा खतरा बताया। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने कार्यकर्ताओं को मतदाता सूचियों के प्रति सतर्क रहने और आगामी चुनौतियों के लिए तैयार रहने का आह्वान किया। साथ ही, नरवाना में एक अन्य पुस्तकालय का उद्घाटन करते हुए उन्होंने शिक्षा को समाज की सबसे बड़ी शक्ति बताया।