गया: बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधि प्रोफेसर विजय कुमार मिट्ठू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से सोना न खरीदने और पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील को केंद्र सरकार की आर्थिक मोर्चे पर बड़ी विफलता करार दिया है। मंगलवार को गयाजी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि जनता को उपदेश देना दरअसल सरकार की अपनी नाकामी को छिपाने का एक जरिया है।
विपक्ष की चेतावनियों को सरकार ने किया नजरअंदाज
प्रोफेसर मिट्ठू ने याद दिलाया कि पिछले कई महीनों से कांग्रेस पार्टी संसद के भीतर और सड़कों पर महंगाई के खिलाफ आवाज उठा रही थी। उन्होंने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत तमाम कांग्रेस नेताओं ने एलपीजी सिलेंडर, पेट्रोल-डीजल और खाद्य वस्तुओं की आसमान छूती कीमतों पर सरकार को घेरा था। उस वक्त केंद्र सरकार ने विपक्ष के इन गंभीर आरोपों को न केवल खारिज किया, बल्कि देश की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में बताया था।
चुनावों के दौरान आंकड़ों की बाजीगरी का आरोप
कांग्रेस नेता ने केंद्र पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि हालिया पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के दौरान सरकार ने जानबूझकर देश की वास्तविक आर्थिक तस्वीर को छिपाए रखा। जैसे ही चुनाव संपन्न हुए, प्रधानमंत्री ने अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ते हुए जनता से कटौती करने की अपील शुरू कर दी। मिट्ठू के अनुसार, यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि देश इस वक्त भीषण आर्थिक दबाव और संसाधनों की भारी कमी से जूझ रहा है।
आम आदमी की स्वतंत्रता पर सरकार का नियंत्रण
सरकार द्वारा क्या खरीदें और कहां घूमें जैसे निर्देशों पर आपत्ति जताते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि अब सरकार तय करना चाहती है कि जनता कितना पेट्रोल खर्च करे और कहां यात्रा करे। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के 12 वर्षों के शासन में अर्थव्यवस्था मजबूत होने के बजाय खोखली हुई है। महंगाई का बोझ हमेशा आम आदमी की जेब पर ही डाला जाता है, जबकि जवाबदेही सरकार की होनी चाहिए।
विदेश नीति और कूटनीतिक दबाव पर सवाल
प्रोफेसर मिट्ठू ने भारत की विदेश नीति पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ भारत के सदियों पुराने और प्रगाढ़ संबंध रहे हैं, लेकिन वर्तमान केंद्र सरकार अमेरिका के दबाव में आकर स्वतंत्र निर्णय लेने में असमर्थ दिखाई दे रही है। उन्होंने अंत में कहा कि प्रधानमंत्री की यह अपील दर्शाती है कि उनके पास देश को आर्थिक संकट से उबारने की कोई ठोस योजना नहीं है।
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