लखनऊ. उत्तर प्रदेश में सिस्टम ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को ही टॉलरेट करना बंद कर दिया है. ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि इसी सिस्टम के एक हिस्से ने अपने ही महकमे पर आरोप लगाया है. लखनऊ कमिश्नरेट में रिजर्व पुलिस में तैनात एक कर्मी ने आईपीएस अफसरों को ‘काला अंग्रेज’ बताया है. उन्होंने आईपीएस अफसरों पर वसूली का गंभार आरोप लगाया है. साथ ही एक वीडियो जारी कर उन्होंने सीएम योगी का ध्यान इस समस्या की ओर आकर्षित किया है.

इधर कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस एक पोस्ट किया है. जिसमें पुलिसकर्मी का वीडियो भी है. पोस्ट में लिखा है कि ‘लखनऊ पुलिस लाइन के कांस्टेबल सुनील शुक्ला चिल्ला-चिल्ला कर बता रहें हैं कि उनके विभाग को ‘काले अंग्रेज’ चला रहे हैं. हर सिपाही से ड्यूटी के नाम पर 2000 की वसूली हो रही है. यानी एक सेक्शन से 8 लाख महीना वसूला जा रहा है. वैसे सरकार बताए कि वसूली का यह पैसा किस ‘साहब’ की तिजोरी में जा रहा है? मुख्यमंत्री जी, आपके नाक के नीचे लखनऊ कमिश्नरेट में वसूली का मेगा शो चल रहा है और आप चुप हैं? क्या इन भ्रष्ट अधिकारियों पर आपका बुलडोजर चलेगा या सिपाही को ही चुप करा दिया जाएगा?’

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वीडियो में कांस्टेबल मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए कह रहे हैं कि ‘लखनऊ कमिश्नरेट के रिजर्व पुलिस लाइन में आपकी नाक के नीचे इन काले अंग्रेजों अर्थात आईपीएस अफसरों को द्वारा लूट की जमींदारी व्यवस्था चलाई जा रही है. ये व्यवस्था इतनी सुव्यवस्थित ढंग से चलाई जाती है जिसपर मैं आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं. काले अंग्रेजों द्वारा नियुक्त किया जाता है आरआई को, आरआई नियुक्त करता है एक गणना प्रभारी को. फिर वो अपनी सुविधा के लिए एक कमांडर नियुक्त करता है. फिर सिपाही दिवान अपना ड्यूटी लगवाने के लिए 2000 हजार रुपये प्रति माह कमांडर के माध्यम से जमा करता है. गार्ड पैसा भी इकट्ठा करता है और अपने आप को बचा भी नहीं पाता है, उसे भी दो हजार रुपया महीना जमा करना पड़ता है.’