लक्ष्मीकांत बंसोड़, बालोद। जिले के आदिवासी विकासखंड अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत बोरगांव से DMF के कार्यों में भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। वर्ष 2025 में बोरगांव हाई स्कूल में बच्चों के लिए साइकिल स्टैंड शेड और कांक्रीटीकरण कार्य के लिए 13 लाख 86 हजार स्वीकृत किए गए थे। इस कार्य की निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत बोरगांव को बनाया गया था, लेकिन सरपंच के बजाय डौंडी के एक ठेकेदार विशाल जैन ने काम मैं लाया हूं कहकर निर्माण शुरू कर दिया। हैरानी की बात ये है कि आधा काम करके कागजों में काम को पूरा बता दिया गया।

पुरानी दीवार पर 4 ईंट जोड़कर खड़ा कर दिया शेड

ठेकेदार विशाल जैन पर आरोप है कि उसने नियमों को ताक पर रखकर स्कूल की पुरानी बाउंड्री वॉल पर महज 4 ईंटें जोड़कर पिलर खड़ा कर दिया और साइकिल स्टैंड शेड का निर्माण कर दिया। इसके साथ ही सामने की तरफ बेहद गुणवत्ताहीन 14 कॉलम खड़े किए गए हैं। स्कूल परिसर में कुछ जगह सीसी रोड बनाकर पुरानी दीवार पर किए गए इस घटिया निर्माण को कागजों में पूरी तरह कंप्लीट बता दिया गया। इतना ही नहीं, मौके पर लगे बोर्ड में कार्य पूर्ण होने की तिथि 12 जून 2026 दर्ज कर दी गई है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि आज भी 50% काम बाकी है।

सरपंच का आरोप

बोरगांव की सरपंच देवकी बाई कोठपरिया ने बताया कि ठेकेदार विशाल जैन ने उनसे कहा था कि वह ग्राम पंचायत में तीन काम लेकर आया है। सरपंच ने कहा कि मैंने कई बार स्कूल की पुरानी दीवार पर साइकिल स्टैंड शेड बनाने का विरोध किया, लेकिन ठेकेदार ने मेरी एक भी नहीं सुनी। जैसे ही पंचायत के खाते में पैसे आए, वह चेक कटवा कर ले गया। आज काम अधूरा और बेहद घटिया स्तर का है। भविष्य में जब इसकी जांच होगी, तो गाज मुझ पर गिरेगी क्योंकि एजेंसी पंचायत है और ठेकेदार काम समेटकर निकल चुका है।

पूरे आदिवासी विकासखंड में ठेकेदारों का बोलबाला

यह मामला केवल एक पंचायत का नहीं है। पूरे आदिवासी विकासखंड में DMF के कार्यों पर ठेकेदारों का बोलबाला है। आरोप है कि डीएमएफ से हमने काम सेन्सन करवाया है कहकर ठेकेदार सरपंच लोगों के हाथों से काम छीन लेते हैं और आधा अधूरा काम कर उन्हें परेशानी में डाल देते हैं। कुछ दिनों पूर्व भी कई पंचायतों में वाटर रिमूवल प्लांट लगाने के नाम पर महज 4×6 का बॉक्स रखकर लाखों रुपये आहरित कर लिए गए, लेकिन जनपद सीईओ ने कार्रवाई करने के बजाय उल्टा सरपंचों को ही नोटिस जारी कर ठेकेदार को संरक्षण दे दिया।

जनपद सीईओ ने क्या कहा ?

जब इस पूरे मामले और गड़बड़ी के दस्तावेजों को जनपद सीईओ डी.डी. मांडले के समक्ष रखा गया, तो शुरुआती तौर पर उन्होंने ऐसी किसी गड़बड़ी से इनकार किया। हालांकि, जब उन्हें मौके के साक्ष्य और दस्तावेज दिखाए गए, तब उन्होंने कहा कि यदि कार्य गुणवत्ताहीन है, तो इसकी जांच करवाई जाएगी और जांच के बाद ही मूल्यांकन व सत्यापन कराएंगे।

अब देखना होगा कि पुरानी दीवार के भरोसे बच्चों का साइकिल शेड खड़ा करने वाले इस रसूखदार ठेकेदार पर प्रशासन निष्पक्ष कार्रवाई करता है या फिर ‘कमीशन के खेल’ में इस फाइल को भी दबा दिया जाएगा।

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