कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़ : चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसायटी (CREST) से जुड़े करीब 75.34 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ा एक्शन लेते हुए सोसायटी के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और भारतीय वन सेवा (IFoS) अधिकारी नवनीत श्रीवास्तव को गिरफ्तार कर लिया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि CREST के खातों से धनराशि का गबन कर उसे विभिन्न फर्जी कंपनियों के माध्यम से निजी उपयोग में लाया गया।

CBI जांच में सामने आया है कि चंडीगढ़ स्थित IDFC बैंक में CREST के तीन खातों में जमा सरकारी धन को कथित तौर पर धोखाधड़ी से अलग-अलग शेल कंपनियों और अन्य खातों में ट्रांसफर किया गया। जांच के दौरान एजेंसी को यह भी पता चला कि इस रकम का एक हिस्सा एक निजी कंपनी के खाते में भेजा गया था, जिसकी मालकिन नवनीत श्रीवास्तव की पत्नी और उनके रिश्तेदार बताए जा रहे हैं। एजेंसी का दावा है कि इस पूरे घटनाक्रम से CREST को लगभग 75 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

गिरफ्तारी के बाद CBI ने नवनीत श्रीवास्तव को विशेष अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें तीन दिन के रिमांड पर भेज दिया गया। एजेंसी अब धन के प्रवाह, कथित लाभार्थियों और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की गहन जांच कर रही है।

इस मामले में CBI इससे पहले CREST के तत्कालीन परियोजना निदेशक सुखविंद्र सिंह अन्ब्रोल और लेखाकार साहिल कुक्कड़ को भी गिरफ्तार कर चुकी है। दोनों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है और वे फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। हाल ही में एजेंसी ने इस मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल की थी। इनमें एक निजी बैंक के पांच अधिकारी, चंडीगढ़ प्रशासन के दो कर्मचारी, दो शेल कंपनियां, उनके तीन निदेशक/साझेदार और एक निजी व्यक्ति शामिल हैं।

CBI फिलहाल हरियाणा और चंडीगढ़ से जुड़े तीन बड़े वित्तीय अनियमितता मामलों की जांच कर रही है। इनमें हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों से जुड़ा फंड गबन मामला, चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी परियोजना से संबंधित मामला और CREST फंड घोटाला शामिल हैं। CREST मामले में पूर्व CEO की गिरफ्तारी को जांच की दिशा में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। एजेंसी को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान धन के पूरे नेटवर्क और कथित साजिश से जुड़े अन्य तथ्यों का भी खुलासा हो सकता है।