तनवीर खान, मैहर। मध्य प्रदेश के मैहर जिले में सिंघाड़ा खेती का नया सीजन शुरू होते ही अन्नदाताओं की चिंताएं बेहद बढ़ गई हैं। जिले के बड़े क्षेत्र में सिंघाड़े की फसल पर एक अज्ञात बीमारी और कीट का प्रकोप देखा जा रहा है, जिससे सैकड़ों हेक्टेयर में फैली फसल नष्ट होने की कगार पर पहुंच गई है। किसानों ने प्रशासन और कृषि विभाग से जल्द से जल्द मदद की गुहार लगाई है।

इन गांवों में तेजी से फैला प्रकोप

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिले के ग्रामीण अंचलों में सिंघाड़े की खेती को भारी नुकसान पहुंच रहा है। मुख्य रूप से:

  • हर्रई
  • नौगाँव न. 4
  • झिन्ना
  • हिनौता
  • मड़करा
  • अमरपाटन
  • लालपुर
  • रिगरा
  • जरियारी

सहित कई अन्य गांवों के तालाबों में सिंघाड़े की फसल बुरी तरह प्रभावित होने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।

‘लाल खजूरा’ कीट ने बढ़ाई मुसीबत, पौधे हो रहे नष्ट

किसानों का आरोप है कि फसल की शुरुआती अवस्था में ही “लाल खजूरा” नाम से पहचाने जाने वाले खतरनाक कीट का प्रकोप दिखाई दे रहा है। इस कीट के हमले के कारण सिंघाड़े की पौध ठीक से तैयार नहीं हो पा रही है। तालाबों में सिंघाड़े की रोपाई के बाद से ही पौधों की वृद्धि पूरी तरह रुक गई है। कई स्थानों पर बेल और पौध लाल पड़कर बेहद कमजोर हो रहे हैं और धीरे-धीरे गलकर नष्ट होते जा रहे हैं।

पैदावार में भारी गिरावट की संभावना

किसानों का कहना है कि “सैकड़ों हेक्टेयर क्षेत्र में फसल पहले ही प्रभावित हो चुकी है। हम भारी लागत लगाकर तालाबों में रोपाई करते हैं, लेकिन इस बार शुरुआत में ही कीटों ने सब बर्बाद कर दिया। यदि कृषि विभाग द्वारा समय रहते खेतों और तालाबों का निरीक्षण कर कोई प्रभावी उपचार या कीटनाशक नहीं सुझाया गया, तो इस वर्ष सिंघाड़ा उत्पादन में भारी गिरावट आएगी और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा।”

सीजन की शुरुआत में ही आए इस संकट ने स्थानीय सिंघाड़ा उत्पादकों की कमर तोड़ दी है। अब देखना होगा कि कृषि विभाग के अधिकारी कब तक इन गांवों का रुख करते हैं और किसानों को इस ‘लाल खजूरा’ कीट से निजात दिलाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

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