महाराष्ट्र की महायुति सरकार में लंबे समय से अटके महामंडलों और निगमों के बंटवारे को लेकर सोमवार 24 अगस्त 2026 को CM फडणवीस के सरकारी आवास वर्षा पर विवाद को खत्म करने के लिए बैठक हुई. महायुति समन्वय समिति की इस बैठक में DPDC समितियों और फंड के वितरण को लेकर भी हिस्सेदारी का फॉर्मूला तय किया गया है. बैठक में बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी के बीच सत्ता-साझेदारी से जुड़े कई लंबित मुद्दों पर चर्चा हुई.

अभी तक बंटवारे की औपचारिक घोषणा नहीं की गई है. सूत्रों के मुताबिक, अगले 15 दिनों के भीतर इस पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है.

महायुति सरकार के अंदर चल रही खींचतान को खत्म करने की कोशिश CM फडणवीस के सरकारी आवास वर्षा पर डिनर के दौरान तेज हो गई है. करीब डेढ़ घंटे तक चली बैठक में महामंडलों के बंटवारे की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और जल्द अंतिम रूप देने पर सहमति बनने की जानकारी सामने आई है. इसमें विधायकों की संख्या को आधार बनाया गया.

महामंडलों और राज्य निगमों के वितरण के लिए विधानसभा में प्रत्येक घटक दल के पास मौजूद विधायकों की संख्या को मुख्य आधार बनाए जाने का प्रस्ताव है. इसके BJP को सबसे ज्यादा हिस्सेदारी मिलेगी. इसके बाद एकनाथ शिंदे की शिवसेना और NCP को हिस्सेदारी दी जाएगी.

CM देवेंद्र फडणवीस के निर्देश के अनुसार, जिला विकास निधि (DPC Fund) के आवंटन के लिए प्रस्तावित प्रारूप के अनुसार 70% राशि स्थानीय विधायकों की अनुशंसा पर विकास कार्यों में खर्च होगी, जबकि शेष 30% राशि संबंधित जिले के पालकमंत्री के स्तर पर तय योजनाओं में लगेगी.

वहीं, महामंडलों को A, B और C कैटेगरी में बांटकर आवंटन किया जाएगा. भाजपा महायुति में सबसे बड़ी पार्टी है. इसलिए महामंडलों और सत्तारूढ़ DPDC समितियों के बंटवारे में भाजपा को सबसे बड़ा हिस्सा मिलेगा.

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