Business Desk – Crude Oil Price : पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव कम होने के संकेतों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी बनी हुई है। ब्रेंट क्रूड का भाव 88 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया है, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) करीब 82 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। बाजार को उम्मीद है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ सकती है, जिससे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता कम हुई है।

ट्रंप बोले- बातचीत को दिया एक और मौका

Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ईरान के खिलाफ संभावित हमलों को रोककर बातचीत को एक और मौका देने का फैसला किया है। हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों देशों के बीच कोई औपचारिक या ठोस वार्ता चल रही है या नहीं। इसके बावजूद इस बयान से बाजार में सकारात्मक संकेत मिले हैं और तेल की कीमतों पर दबाव बना है।

तनाव बढ़ने से पहले चढ़े थे दाम, अब आई राहत

इस महीने कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और लाल सागर तक संघर्ष बढ़ने की आशंकाओं के कारण पहले तेल महंगा हुआ था। लेकिन हाल के दिनों में तनाव कम होने और बातचीत की उम्मीद बढ़ने से कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है।

शिपिंग दोबारा शुरू करने पर हो रही बातचीत

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान और ओमान के अधिकारी उस अहम समुद्री मार्ग पर तेल परिवहन फिर से शुरू कराने के लिए बातचीत कर रहे हैं, जिसके जरिए शांति के समय दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता था। यह मार्ग फारस की खाड़ी को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों की सप्ताहांत में तेहरान में बैठक भी हुई। यदि यह व्यवस्था सफल रहती है, तो अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने की दिशा में भी प्रगति हो सकती है।

ईरान ने जवाबी कार्रवाई रोकने का किया ऐलान

ईरान की सेना ने भी घोषणा की है कि उसने क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों और सैन्य ठिकानों के खिलाफ अपनी जवाबी कार्रवाई रोक दी है। इस कदम को भी बाजार ने सकारात्मक संकेत के रूप में लिया, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में और नरमी देखने को मिली।

कजाकिस्तान से सप्लाई बढ़ने से भी मिला सहारा

ब्लूमबर्ग की एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेनी ड्रोन हमलों के कारण बाधित हुई तेल सप्लाई में भी अब सुधार के संकेत मिल रहे हैं। रूस के नोवोरोस्सिय्स्क बंदरगाह के पास स्थित कैस्पियन पाइपलाइन कंसोर्टियम (CPC) टर्मिनल पर फिर से दो तेल टैंकरों की लोडिंग शुरू हो गई है।

कजाकिस्तान के ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक, इससे वैश्विक बाजार में सप्लाई से जुड़ी चिंताएं कम होंगी और तेल की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है।

आगे किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर

आने वाले दिनों में कच्चे तेल की दिशा काफी हद तक अमेरिका-ईरान संबंधों, पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति और वैश्विक सप्लाई पर निर्भर करेगी। यदि बातचीत आगे बढ़ती है और तेल आपूर्ति सामान्य रहती है, तो कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। वहीं, किसी भी नए भू-राजनीतिक तनाव की स्थिति में तेल की कीमतों में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है।