नई दिल्ली/पटना। रोजी-रोटी की तलाश में बिहार से दिल्ली गए दो मेहनतकश युवकों की बर्बर हत्या ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। खगड़िया जिले के गंगौर थाना क्षेत्र के रहने वाले पाण्डव कुमार और उनके साथी की हत्या सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि “बिहारियत” और बिहार के स्वाभिमान पर एक गहरा घाव है। इस घटना ने एक बार फिर महानगरों में बिहार के प्रवासियों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
नस्लीय टिप्पणी और फिर गोलियों की बौछार
मिली जानकारी के अनुसार, इन युवकों को पहले “बिहारी” कहकर अपमानित किया गया और उनके साथ भद्दी गालियां दी गईं। जब उन्होंने अपने आत्मसम्मान के लिए आवाज उठाई, तो उन्हें बेरहमी से गोलियों से भून दिया गया। यह कृत्य दर्शाता है कि नफरत की जड़ें कितनी गहरी हो चुकी हैं। मेहनत के दम पर अपना भविष्य संवारने गए युवाओं को उनकी पहचान के कारण निशाना बनाना देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर कलंक है।
डॉ. संतोष कुमार सुमन का कड़ा रुख
हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (से.) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार सरकार के पूर्व मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने इस घटना पर तीखा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने इसे सीधे तौर पर बिहार के पसीने और साहस पर हमला बताया है। डॉ. सुमन ने कहा, “बिहार के लोग देश के निर्माण में अपना खून-पसीना बहाते हैं। उन्हें इस तरह अपमानित करना और उनकी जान लेना बर्दाश्त से बाहर है। बिहार का स्वाभिमान अटूट है और इसकी रक्षा हर कीमत पर की जाएगी।”
गृहमंत्री से उच्चस्तरीय जांच की मांग
- डॉ. सुमन ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने पत्र लिखकर मांग की है कि:
- इस जघन्य हत्याकांड की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए।
- दोषी चाहे कोई भी हो, या किसी भी पद या वर्दी के पीछे छिपा हो, उसे कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।
- राजधानी दिल्ली सहित देश के अन्य राज्यों में बिहारियों की सुरक्षा के लिए ठोस प्रोटोकॉल बनाया जाए।
बिहारियत का अपमान अब और नहीं
यह घटना बिहार के उन लाखों युवाओं के लिए चिंता का विषय है जो घरों से दूर रहकर देश की अर्थव्यवस्था को गति देते हैं। अब समय आ गया है कि सरकारें एक ऐसा कड़ा संदेश दें कि “बिहार” या “बिहारी” शब्द का अपमान करने वालों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। डॉ. सुमन ने स्पष्ट किया कि बिहार इस दुख की घड़ी में पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा है और न्याय मिलने तक यह संघर्ष जारी रहेगा।
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