दिल्ली सरकार में 1 जुलाई को ई-ऑफिस व्यवस्था लागू हुए एक साल पूरा हो जाएगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने कहा कि पिछले 1 साल में सरकारी कामकाज के तरीके में बड़ा बदलाव आया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब कागजी फाइलों की जगह अधिकांश सरकारी काम ऑनलाइन माध्यम से हो रहा है। इससे फाइलों के निस्तारण की प्रक्रिया तेज हुई है और प्रशासन पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बना है। रेखा गुप्ता ने कहा कि ई-ऑफिस व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी प्रक्रियाओं को सरल, तेज और प्रभावी बनाना है। डिजिटल प्रणाली के जरिए फाइलों की ट्रैकिंग आसान हुई है और निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी तेजी आई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब ई-ऑफिस के माध्यम से किसी भी फाइल की स्थिति आसानी से ट्रैक की जा सकती है। इससे यह जानकारी मिल जाती है कि फाइल किस अधिकारी के पास लंबित है और उस पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि डिजिटल व्यवस्था से सरकारी रिकॉर्ड अधिक सुरक्षित हुआ है, अनावश्यक देरी कम हुई है और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हुआ है। इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी और तेज हुई है।
ई-ऑफिस से प्रशासन हुआ तेज और जवाबदेह
मुख्यमंत्री के अनुसार, 8 मार्च 2025 तक दिल्ली सरकार के 198 विभागों और कार्यालयों के 5,005 अधिकारी-कर्मचारी ई-ऑफिस प्रणाली से जुड़े थे। वहीं, 27 जून 2026 तक यह संख्या बढ़कर 235 विभागों एवं कार्यालयों के 15,748 अधिकारी-कर्मचारियों तक पहुंच गई है। रेखा गुप्ता ने बताया कि सभी विभागों की कार्यप्रणाली अलग-अलग होने के कारण ई-ऑफिस व्यवस्था को 3 अलग-अलग श्रेणियों में विकसित किया गया है। पहली श्रेणी सरकारी विभागों के लिए बनाई गई है, जबकि दूसरी श्रेणी सार्वजनिक उपक्रमों, बोर्डों, निगमों, आयोगों, समितियों, स्वायत्त संस्थानों और स्थानीय निकायों के लिए है। उन्होंने बताया कि तीसरी श्रेणी विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इसका उद्देश्य अलग-अलग संस्थानों की जरूरतों के अनुसार डिजिटल कार्यप्रणाली को बेहतर तरीके से लागू करना है।
ई-ऑफिस का उपयोग अनिवार्य
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि 1 जुलाई 2025 से दिल्ली सरकार के सभी सरकारी विभागों में ई-ऑफिस का उपयोग अनिवार्य किया गया था। मुख्यमंत्री के अनुसार, वर्तमान में 132 सरकारी विभाग इस डिजिटल व्यवस्था से जुड़े हैं, जहां 11,940 सक्रिय उपयोगकर्ता ई-ऑफिस के माध्यम से काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 1 जुलाई 2025 से 12 अप्रैल 2026 के बीच सरकारी विभागों में 1,14,603 ई-फाइलों और 7,14,091 ई-रसीदों का निस्तारण किया गया। वहीं, 13 अप्रैल 2026 से 27 जून 2026 के बीच 23,767 ई-फाइलों और करीब 1.53 लाख ई-रसीदों का निपटारा किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये आंकड़े ई-ऑफिस व्यवस्था के बढ़ते उपयोग और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में डिजिटल बदलाव को दर्शाते हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सार्वजनिक उपक्रमों, बोर्डों, निगमों, आयोगों, समितियों और अन्य स्वायत्त एवं स्थानीय निकायों में भी ई-ऑफिस का विस्तार किया गया है। इन 55 संस्थाओं में 3,090 सक्रिय उपयोगकर्ता इस प्रणाली के माध्यम से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन संस्थाओं में 15 अप्रैल से 27 जून 2026 के बीच 4,672 ई-फाइलों और 55,132 ई-रसीदों का निस्तारण किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ई-ऑफिस व्यवस्था से सरकारी प्रक्रियाएं तेज हो रही हैं और प्रशासन में पारदर्शिता व जवाबदेही को मजबूती मिल रही है।
दिल्ली सरकार की ई-ऑफिस व्यवस्था अब विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में भी तेजी से लागू की जा रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि शैक्षणिक क्षेत्र की 48 संस्थाओं में 718 सक्रिय उपयोगकर्ता ई-ऑफिस प्रणाली का इस्तेमाल कर रहे हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, इन संस्थानों में 17 अप्रैल से 27 जून 2026 के बीच 1,267 ई-फाइलों और 3,051 ई-रसीदों का निस्तारण किया गया। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्रणाली के विस्तार से संस्थानों में कार्यप्रणाली को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाया जा रहा है।
दिल्ली सरकार का लक्ष्य ऐसा प्रशासनिक तंत्र विकसित करना है, जहां सरकारी कामकाज तेज, पारदर्शी और जवाबदेह हो। उन्होंने कहा कि नागरिकों को सरकारी सेवाओं के लिए अनावश्यक इंतजार न करना पड़े, इसके लिए डिजिटल माध्यमों को लगातार मजबूत किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में ई-ऑफिस व्यवस्था का दायरा और बढ़ाया जाएगा, ताकि दिल्ली में सुशासन को और मजबूती दी जा सके। उन्होंने कहा कि तकनीक के इस्तेमाल से प्रशासन को अधिक कुशल और नागरिक केंद्रित बनाया जा रहा है।
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