प्रधानमंत्री मोदी की अपील के बाद दिल्ली सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) सरकार ने ‘मेरा भारत, मेरा योगदान’ अभियान के तहत कई महत्वपूर्ण फैसलों की घोषणा की है। सरकार के मुताबिक, अब सरकारी कर्मचारियों को सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम (WFH) की सुविधा दी जाएगी। इसके साथ ही निजी संस्थानों और कॉरपोरेट कंपनियों से भी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम देने की अपील की गई है, ताकि ईंधन की खपत कम हो और प्रदूषण पर नियंत्रण पाया जा सके। दिल्ली सरकार ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य पेट्रोल-डीजल की बचत, ऊर्जा संरक्षण और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना है। सरकार का मानना है कि अगर बड़ी संख्या में लोग घर से काम करेंगे तो सड़कों पर वाहनों की संख्या कम होगी, जिससे ईंधन की बचत के साथ-साथ प्रदूषण में भी कमी आएगी।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लोगों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि ऊर्जा संरक्षण को जन आंदोलन बनाना समय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देशहित में हर नागरिक को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी और छोटे-छोटे प्रयास भी बड़ा बदलाव ला सकते हैं। ‘मेरा भारत, मेरा योगदान’ अभियान 15 मई से शुरू किया जा रहा है। दिल्ली सरकार सरकार ने घोषणा की है कि अब सरकारी कर्मचारी सप्ताह में दो दिन घर से काम यानी वर्क फ्रॉम होम (WFH) करेंगे। हालांकि, जरूरी सेवाओं से जुड़े विभागों को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है। सरकार के मुताबिक, यह फैसला ईंधन की खपत कम करने और प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के उद्देश्य से लिया गया है। इसके साथ ही निजी संस्थानों और कंपनियों से भी कर्मचारियों को सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम देने की अपील की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभियान अगले 90 दिनों तक चलाया जाएगा और इसके जरिए लोगों को देशहित में योगदान देने के लिए प्रेरित किया जाएगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सभी यूनिवर्सिटी और कॉलेजों से भी इस अभियान में सहयोग की अपील की है। उन्होंने अदालतों से भी अनुरोध किया कि जहां संभव हो, ऑनलाइन सुनवाई को बढ़ावा दिया जाए ताकि अनावश्यक यात्रा कम हो और ईंधन की बचत हो सके। इसके अलावा सरकार ने जनता से एक साल तक गैर जरूरी विदेशी यात्राएं नहीं करने की अपील की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार का कोई भी मंत्री या अधिकारी विदेशी यात्रा पर नहीं जाएगा। जो आधिकारिक विदेशी दौरे तय थे, उन्हें भी रद्द कर दिया गया है।
रेखा गुप्ता ने यह भी घोषणा की कि आने वाले समय में दिल्ली सरकार कोई बड़ा सरकारी कार्यक्रम या भव्य आयोजन नहीं करेगी। उनका कहना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में संसाधनों की बचत और देशहित को प्राथमिकता देना जरूरी है। प्रधानमंत्री की स्वदेशी और पर्यटन से जुड़ी अपील का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अब दिल्ली के मॉल्स में ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों के लिए विशेष कॉर्नर बनाए जाएंगे। दिल्ली सरकार खुद भी 100 प्रतिशत भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता देगी। सरकार के अनुसार, अगले 90 दिनों तक विभिन्न संस्थानों, दफ्तरों और संगठनों में लोगों को ईंधन बचाने, गैर जरूरी सामानों की खरीद से बचने, विदेशी यात्राओं को कम करने, खाद्य तेल की बचत और मेड इन इंडिया उत्पादों के इस्तेमाल की शपथ दिलाई जाएगी।
दिल्ली सरकार की 50% मीटिंग ऑनलाइन होंगी
मुख्यमंत्री ने व्यापारियों और उद्योगों से अपील की कि वे माल ढुलाई के लिए ट्रकों की जगह रेल परिवहन का अधिक इस्तेमाल करें। उनका कहना है कि इससे ईंधन की बचत होगी और सड़कों पर ट्रैफिक व प्रदूषण भी कम होगा। सरकार ने राजधानी की 29 कॉलोनियों में 58 नई फीडर बसें चलाने का भी ऐलान किया है। इन बसों का उद्देश्य लोगों को मेट्रो स्टेशनों तक बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है, ताकि अधिक से अधिक लोग निजी वाहनों की बजाय मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें। इसके अलावा दिल्ली सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर भी बदलाव किए हैं। अब दिल्ली सरकार की 50 प्रतिशत बैठकें ऑनलाइन आयोजित की जाएंगी। सरकार का कहना है कि इससे अनावश्यक यात्रा कम होगी और समय के साथ ईंधन की भी बचत होगी। सरकारी कार्यालयों के कामकाज के समय में भी बदलाव किया गया है। अब दिल्ली सरकार के दफ्तर सुबह 10:30 बजे से शाम 7 बजे तक खुलेंगे, जबकि MCD के दफ्तरों का समय सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक रहेगा।
जनता से नो व्हीकल डे मनाने की अपील
मुख्यमंत्री ने जनता से “नो व्हीकल डे” मनाने की अपील करते हुए सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि सरकारी कर्मचारियों का ट्रांसपोर्ट अलाउंस 10 प्रतिशत बढ़ाया जाएगा, बशर्ते वे अपने यात्रा खर्च का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर खर्च करें। सरकार का उद्देश्य कर्मचारियों को निजी वाहनों की बजाय मेट्रो और बसों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित करना है। रेखा गुप्ता ने बताया कि उन्होंने खुद भी अपने काफिले में बड़ी कटौती की है। पहले उनके काफिले में 13 से 14 गाड़ियां शामिल होती थीं, जिसे घटाकर अब सिर्फ 4 वाहन कर दिया गया है। इसके अलावा अधिकारियों के लिए तेल की सीमा में भी 20 प्रतिशत कटौती करने का फैसला लिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब हर सोमवार को “मेट्रो मंडे” के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन मुख्यमंत्री, मंत्री और सभी वरिष्ठ अधिकारी मेट्रो से यात्रा करेंगे। सरकार का मानना है कि इससे आम लोगों में भी सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को लेकर सकारात्मक संदेश जाएगा। उन्होंने बताया कि दिल्ली सरकार की नई ईवी पॉलिसी तैयार है और जल्द इसे लागू किया जाएगा। इसके साथ ही बिजली बचत पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सभी सरकारी दफ्तरों में एयर कंडीशनर (AC) को 24 से 26 डिग्री तापमान पर सेट किया जाएगा ताकि बिजली की खपत कम हो सके।
हफ्ते में एक दिन बिना कार के काम करेंगे कर्मचारी
लोक निर्माण विभाग, दिल्ली जल बोर्ड और बाढ़ एवं सिंचाई विभाग ने अपने दफ्तरों में सप्ताह में एक दिन ‘नो कार डे’ लागू करने का फैसला लिया है. इस दिन अधिकारी और कर्मचारी निजी कारों का इस्तेमाल नहीं करेंगे और सार्वजनिक परिवहन या अन्य वैकल्पिक साधनों को प्राथमिकता देंगे. सरकार ने अधिकारियों की विदेश यात्राओं पर भी रोक लगा दी है. जिन विदेशी दौरों के प्रस्ताव पहले से लंबित थे, उन्हें तत्काल प्रभाव से रद्द करने के निर्देश जारी किए गए हैं. माना जा रहा है कि इससे सरकारी खर्च और ईंधन दोनों की बचत होगी. अनावश्यक यात्रा को रोकने के लिए ऑनलाइन बैठकों को बढ़ावा दिया जाएगा. विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि जहां संभव हो, मीटिंग्स डिजिटल माध्यम से आयोजित की जाएं ताकि समय और फ्यूल दोनों की बचत हो.
सरकारी वाहनों के इस्तेमाल में कटौती
नई नीति के तहत विभागों को सरकारी गाड़ियों का उपयोग कम से कम करने को कहा गया है. कर्मचारियों को मेट्रो, बस और इलेक्ट्रिक वाहनों का अधिक इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है. साथ ही सरकारी वाहन बेड़े को तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है. निरीक्षण, फील्ड विजिट और कार्यालय आने-जाने के दौरान कर्मचारियों को कार पूलिंग अपनाने की सलाह दी गई है. सरकारी कार्यक्रमों और निरीक्षणों के लिए समूह में यात्रा करने पर जोर दिया गया है, ताकि अनावश्यक ईंधन खर्च को रोका जा सके.
डीजल पंपों की जगह इलेक्ट्रिक सिस्टम पर फोकस
सरकार अब डीजल चालित पंपों के उपयोग को कम करने की दिशा में भी काम करेगी। दिल्ली सरकार ने विभिन्न विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे डीजल पंपों की जगह इलेक्ट्रिक पंप और स्थायी पंपिंग स्टेशनों के इस्तेमाल को प्राथमिकता दें। सरकार का मानना है कि इससे डीजल की खपत कम होगी और प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिलेगी। इसके साथ ही राजधानी के सरकारी कार्यालय परिसरों में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। सरकार चाहती है कि आने वाले समय में अधिक से अधिक सरकारी कर्मचारी इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाएं और पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम हो।
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m

