वैश्विक राजनीति में चीन की चुनौतियों की चर्चा अक्सर अमेरिका, ताइवान और आर्थिक प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में होती है। लेकिन देश के सामने एक और गंभीर संकट तेजी से उभर रही है जो है, घटती शादियाँ और गिरती जन्मदर।

जानकारी के अनुसार, 2025 की पहली तिमाही में चीन में 17 लाख से भी कम विवाह पंजीकृत हुए, जो पिछले एक दशक का सबसे निचला स्तर है। 2017 की तुलना में विवाहों की संख्या लगभग आधी रह गई है। देश में “नो मैरिज, नो किड्स” का ट्रेंड युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

सरकार बच्चे करने के लिए कर रही प्रोत्साहित

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकार लोगों को शादी और बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। सब्सिडी, लंबी पेरेंटल लीव, आर्थिक सहायता, विवाह परामर्श और मैचमेकिंग कार्यक्रम जैसे कई कदम उठाए गए हैं। तीन साल तक के बच्चों के लिए वार्षिक वित्तीय सहायता भी दी जा रही है। इसके बावजूद युवा पीढ़ी का रुझान नहीं बदल रहा।

इन वजहों से शादी से दूर भाग रहे युवा

-विशेषज्ञों के अनुसार, इसकी सबसे बड़ी वजह महिलाओं पर बढ़ता सामाजिक और पारिवारिक दबाव है। शादी और मातृत्व अक्सर उनके करियर पर असर डालते हैं, जिससे कई शिक्षित और आर्थिक रूप से स्वतंत्र महिलाएँ विवाह और मातृत्व को टाल रही हैं।

-इस संकट की जड़ें 1980 में लागू वन-चाइल्ड पॉलिसी में भी हैं। इस नीति ने जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित किया, लेकिन अब चीन बूढ़ी होती आबादी, घटते कार्यबल और बिगड़ते लिंगानुपात जैसी समस्याओं का सामना कर रहा है।

-महंगे मकान, शिक्षा और स्वास्थ्य खर्च भी युवाओं को परिवार बढ़ाने से रोक रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रही तो आने वाले दशकों में चीन की अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है।

गौरतलब है कि, यह चुनौती केवल चीन तक सीमित नहीं है। दुनिया के अधिकांश देशों की तरह भारत भी घटती प्रजनन दर की समस्या का सामना कर रहा है।एक्सपर्ट्स का मानना है कि केवल सब्सिडी देने या महिलाओं से अधिक बच्चे पैदा करने की अपील करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए सस्ती आवास व्यवस्था, बेहतर चाइल्ड केयर सुविधाएं, लैंगिक समानता, प्रजनन अधिकारों की सुरक्षा और परिवार की जिम्मेदारियों का समान बंटवारा सुनिश्चित करना होगा।

सामाजिक बदलाव के बिना मुश्किल है समाधान

विशेषज्ञों के अनुसार यदि परिवार और बच्चों की जिम्मेदारी का अधिकांश बोझ केवल महिलाओं पर डाला जाएगा तो स्वाभाविक रूप से वे विवाह और मातृत्व से दूरी बनाना चाहेंगी। करियर और परिवार में से किसी एक को चुनने की मजबूरी समाप्त करनी होगी।

साथ ही महिलाओं को केवल पत्नी और मां की भूमिका तक सीमित देखने वाली सामाजिक सोच में बदलाव लाना होगा। तभी चीन सहित दुनिया के अन्य देशों में गिरती जन्मदर और घटती शादियों की चुनौती का प्रभावी समाधान संभव हो सकेगा।

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