दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव के दौरान हुई हिंसा को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन को फटकार लगाते हुए कहा कि इससे ज्यादा चिंता की बात क्या हो सकती है कि देश की राजधानी में छात्रसंघ चुनाव के दौरान इस तरह की घटनाएं हो रही हैं। अदालत ने छात्रसंघ चुनाव लड़ रहे सभी 140 उम्मीदवारों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने उनसे पूछा है कि चुनाव के दौरान हुई हिंसा और कथित नियमों के उल्लंघन के लिए उन पर हर्जाना क्यों न लगाया जाए। मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने भी अब तक की कार्रवाई और उठाए गए कदमों की स्थिति अदालत के सामने रखी।

सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने मुख्य न्यायाधीश की पीठ को बताया कि मामले में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर दी गई है। दिल्ली पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट भी पीठ के समक्ष पेश की गई। सुनवाई के दौरान पीठ ने नॉर्थ कैंपस में बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियों के कथित काफिले को लेकर संबंधित पुलिस उपायुक्त से सवाल किए। अदालत ने तस्वीरों का हवाला देते हुए कहा कि तस्वीरों से इनकार नहीं किया जा सकता। पीठ ने सवाल किया कि जब मौके पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात थे, तो फिर बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियों के काफिले को वहां से गुजरने की अनुमति कैसे दी गई।

गाड़ियों के काफिले पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी

पुलिस उपायुक्त ने पीठ को बताया कि पुलिस लगातार गाड़ियों की चेकिंग कर रही है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह के काफिले से डर, आतंक और दबदबे की भावना पैदा होती है। पीठ ने पुलिस से पूछा कि इन्हें रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। अदालत ने तस्वीरों का हवाला देते हुए कहा कि उम्मीदवार कारों की छत और आगे के बोनट पर खड़े नजर आ रहे हैं और इस तरह खुलेआम नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है।

पीठ ने यह भी पूछा कि छात्र संगठनों की ओर से अदालत में कौन पेश हुआ है। सुनवाई के दौरान एएसजी चेतन शर्मा ने बताया कि मामले में 998 चालान जारी किए गए हैं। वीडियो में नजर आ रहे लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और संबंधित वाहनों की आरसी भी जब्त की जाएगी। उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति को संगठन से निकाला गया है, जबकि छह एफआईआर दर्ज की गई हैं और चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर 5,737 चालान

एएसजी ने अदालत को बताया कि ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन को लेकर अब तक 5,737 चालान किए गए हैं। इनमें बिना लाइसेंस और अन्य यातायात नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामले शामिल हैं। अदालत ने चुनाव के दौरान सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाए गए कदमों को लेकर पुलिस से जवाब मांगा।

प्रोफेसरों पर हमले को लेकर भी हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने प्रोफेसरों पर हुए हमले को लेकर सवाल किया और पूछा कि इस मामले में क्या कार्रवाई हुई है। उन्होंने यह भी पूछा कि गिरफ्तार किया गया व्यक्ति छात्र है या नहीं। इस पर एएसजी ने बताया कि प्रोफेसर पर हमला छात्रों ने ही किया था। पीठ ने सवाल किया कि अगर हमले में छात्र ही शामिल थे, तो क्या इसमें बाहरी लोग शामिल नहीं थे? अदालत ने यह भी पूछा कि छात्रों के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी कॉलेज अधिकारियों को दी गई है या नहीं और संबंधित छात्रों के खिलाफ क्या कदम उठाए गए हैं। इस पर दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से बताया गया कि संबंधित छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।

छात्र संगठनों के वकीलों की मौजूदगी पर भी सवाल

सुनवाई के दौरान एबीवीपी की ओर से अधिवक्ता अपूर्ण कुरुप और एनएसयूआई की ओर से अधिवक्ता ऋषव रंजन हाईकोर्ट में पेश हुए। वहीं, एएसएपी छात्र संगठन की ओर से पेश वकील ने कहा कि उनके संगठन की ओर से कोई गुंडागर्दी नहीं की गई है। इस पर पीठ ने एएसएपी के एक उम्मीदवार की कार की छत पर खड़े होने से जुड़ी तस्वीरें दिखाने को कहा। अदालत ने तस्वीरों के आधार पर उम्मीदवारों और छात्र संगठनों की भूमिका को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की।

डीयू को हाईकोर्ट की फटकार, कहा- राजधानी में ऐसा होना चिंताजनक

डूसू चुनाव प्रचार के दौरान हुई हिंसा और नियमों के उल्लंघन को लेकर हाईकोर्ट की पीठ ने दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई। पीठ ने कहा कि इससे ज्यादा चिंताजनक बात क्या हो सकती है कि देश की राजधानी में इस तरह की घटनाएं हो रही हैं। इस पर डीयू के वकील ने अदालत से माफी मांगते हुए कहा कि विश्वविद्यालय उम्मीदवारों की जांच करेगा। पीठ ने इस पर सवाल किया कि आखिर विश्वविद्यालय क्या जांच करेगा। अदालत ने संकेत दिया कि वह चुनाव के दौरान हुई घटनाओं को लेकर सामूहिक चुनावी हर्जाना लगाए जाने के विकल्प पर विचार करेगी।

एएसएपी के वकील ने भी मांगी माफी

सुनवाई के दौरान एएसएपी की ओर से पेश वकील ने भी अदालत से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि संगठन केवल दो पदों पर चुनाव लड़ रहा है और उसकी ओर से इस तरह की गतिविधियों में शामिल होने की बात नहीं है। डूसू चुनाव प्रचार के दौरान हुई हिंसा को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने चुनाव के बाद होने वाले विजय जुलूस पर रोक लगा दी है। अदालत के इस निर्देश का उद्देश्य चुनाव परिणाम के बाद संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रित रखना है।

साल दर साल हो रही घटनाओं पर हाईकोर्ट नाराज

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने कहा कि अदालत अलग-अलग उम्मीदवारों को कारण बताओ नोटिस और छात्र संगठनों को सामूहिक क्षति के लिए नोटिस जारी कर रही है। पीठ ने कहा कि इस बात पर कोई टिप्पणी नहीं की जा रही कि डीयू किस तरह बिना किसी तार्किक निष्कर्ष पर पहुंचे सामान्य तरीके से कारण बताओ नोटिस जारी कर रहा है। अदालत ने कहा कि इस तरह की घटनाएं साल दर साल हो रही हैं, लेकिन कुछ नहीं बदल रहा। पीठ ने कहा कि एक छात्र के चुनाव जीतने के बाद प्रोफेसर को थप्पड़ मारने जैसी घटना की कल्पना कौन कर सकता है। अदालत ने कहा कि जीत के बाद छात्रों को और अधिक विनम्र होना चाहिए।

लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश

पीठ ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय और अन्य संबंधित अधिकारी हर संभव कार्रवाई और उपाय करें, ताकि लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों और अदालत के समय-समय पर जारी किए गए आदेशों का उल्लंघन न हो। अदालत ने दिल्ली नगर निगम समेत अन्य विभागों को भी यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि सार्वजनिक संपत्ति को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे। पीठ ने कहा कि यदि किसी तरह का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित एजेंसी तत्काल कार्रवाई करे।

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