दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम कदम उठाते हुए जमानत मिलने के बावजूद महीनों तक जेल में बंद रहने को मजबूर कैदियों के हित में आदेश दिया है। कोर्ट ने सभी जेल सुपरिटेंडेंट को आधार QR कोड वेरिफ़िकेशन एप्लीकेशन इस्तेमाल करने का आदेश दिया है जिससे कि जमानत पाने वाले कैदियों की जल्द रिहाई हो सके. अंडरट्रायल कैदियों को जमानत मिलने के बाद रिहा करने में बार बार होनेवाली ज्यादा देरी को देखते हुए यह आदेश दिया.

हाई कोर्ट ने सभी जेल अधीक्षकों को आदेश दिया है कि जमानतदारों की पहचान और उनके डॉक्यूमेंट के वेरिफ़िकेशन के लिए आधार क्यूआर कोड आधारित तकनीक का इस्तेमाल करें.

दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और अमित महाजन की एक डिवीजन बेंच ने 22 मई 2026 को यह आदेश दिया कि जमानत पाने वाले कैदियों की रिहाई में तेजी लाने के लिए आधार QR कोड जमानतदारों के सत्यापन के लिए अनिवार्य होगा जिससे कि जमानत मिलने के बावजूद 50 दिनों तक कैदियों की रिहाई में होनेवाली देरी को दूर किया जा सके.

हाई कोर्ट ने आदेश दिया है कि दिल्ली भर के सभी जेल अधीक्षक ये कदम उठाएंगे. हाई कोर्ट ने माना है कि जमानतदारों की पहचान और उसकी प्रामाणिकता को सत्यापित करने में बहुत ही ज्यादा समय लगता है. इसलिए बहुत ज्यादा देरी से बचने के लिए कोर्ट ने आधार बेस्ड वेरिफ़िकेशन ऐप्स के इस्तेमाल का सुझाव दिया.

एक डाटा से पता चलता है कि 1 फरवरी से 15 फरवरी, 2026 के बीच जमानत आदेशों के बाद कैदियों और दोषियों को रिहा करने में लगने वाला समय करीब 5-6 दिन था.

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक कैदी के जमानत दिए जाने के बावजूद भी उसे बहुत दिनों तक जेल में ही रहना पड़ा जिसके कारण कोर्ट ने स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई करते हुए ये निर्देश पारित किए, क्योंकि जेल सुपरिटेंडेंट सत्यापन की सारी विधि पूरी नहीं की थीं.

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