दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने राजधानी के यमुना बाढ़ क्षेत्र (Yamuna Floodplain) यानी ज़ोन-O में तेजी से बढ़ रहे अवैध निर्माण पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने साफ कहा कि यमुना खादर क्षेत्र में विकसित की जा रही रिहायशी कॉलोनियां पूरी तरह गैरकानूनी और अस्वीकार्य हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित एजेंसियों और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और चेतावनी दी कि यदि अवैध निर्माण पर रोक नहीं लगी तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अदालत ने कहा कि बाढ़ क्षेत्र में अनियंत्रित निर्माण पर्यावरण और सार्वजनिक सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर खतरा है। कोर्ट ने संकेत दिया कि यदि अवैध निर्माण जारी रहता है तो संबंधित विभागों के अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। कोर्ट ने एजेंसियों को प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह ने सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि एमसीडी इंजीनियरों की निगरानी में ही ताजा अवैध निर्माण हो रहे हैं। अदालत ने संबंधित एग्जीक्यूटिव इंजीनियरों के नाम अगली सुनवाई में पेश करने और उन्हें व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यमुना बाढ़ क्षेत्र जैसे पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील इलाकों में किसी भी तरह के नए निर्माण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही DDA को निर्देश दिया गया कि ज़ोन-O में मरम्मत या रेनोवेशन के नाम पर भी नया निर्माण नहीं होने दिया जाए।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष जगतपुर गांव, वजीराबाद, राम घाट और मजनू का टीला के न्यू अरुणा नगर समेत कई इलाकों की तस्वीरें और रिपोर्ट पेश की गईं, जिनमें ताजा अवैध निर्माण गतिविधियां साफ दिखाई दे रही थीं। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि संबंधित सरकारी एजेंसियां आंख मूंदकर बैठी हैं और अवैध निर्माण को रोकने में विफल रही हैं। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि फिलहाल ज़ोन-O की 91 अवैध कॉलोनियों को 31 दिसंबर 2026 तक अस्थायी राहत दी गई है। सरकार के अनुसार, यह राहत ‘नेशनल कैपिटल टेरिटरी ऑफ दिल्ली लॉ सेकंड एक्ट 2011’ के तहत प्रदान की गई है। हालांकि, केंद्र ने यह भी स्पष्ट किया कि इस राहत का मतलब वहां रहने वाले लोगों को किसी प्रकार का मालिकाना हक नहीं देना है।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि ज़ोन-O की 91 अवैध कॉलोनियों में करीब 5 से 6 लाख लोग रह रहे हैं और वहां लगभग 1 लाख मकान बने हुए हैं। केंद्र, दिल्ली सरकार और अन्य संबंधित एजेंसियां इन निवासियों के पुनर्वास और भविष्य की योजना को लेकर विचार-विमर्श कर रही हैं। मामले को गंभीर मानते हुए अदालत ने मिनिस्ट्री, MCD और DDA के अधिकारियों को 8 जून को बैठक करने का निर्देश दिया है। साथ ही कोर्ट ने अवैध कब्जों और नए निर्माण को रोकने के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत रिपोर्ट अगली सुनवाई में पेश करने को कहा है।

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