राजधानी के समग्र विकास के लिए बहुप्रतीक्षित मास्टर प्लान-2041 को जल्द नोटिफाई करने की तैयारियां तेज हो गई हैं। यह योजना पहले ही लगभग 5 साल की देरी से चल रही है, जिसके चलते अब इसकी अवधि को संशोधित कर 20 साल से घटाकर 15 साल का विकास रोडमैप माना जा रहा है। यह मास्टर प्लान लागू होने के बाद दिल्ली के शहरी विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इसमें शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यावरण और नागरिक सुविधाओं को आधुनिक बनाने पर विशेष जोर दिया गया है।

दिल्ली के मास्टर प्लान-2041 (MPD-2041) को लेकर शहरी विकास मंत्रालय और दिल्ली विकास प्राधिकरण (Delhi Development Authority) के बीच प्रक्रिया तेज हो गई है। अधिकारियों के अनुसार, इस योजना को आने वाले कुछ महीनों में अंतिम मंजूरी मिलने की संभावना है और इसे 15 अगस्त से पहले लागू किए जाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। यह मास्टर प्लान पहले 2021 में लागू होना था, लेकिन तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से इसमें लगातार देरी होती गई। पहले यह 2023 तक खिसका और फिर इसके बाद भी कई बार समयसीमा आगे बढ़ती रही।

नई योजना लागू होने के बाद दिल्ली के विकास में कई बड़े बदलावों पर जोर रहेगा, जैसे यमुना नदी की सफाई और पुनर्जीवन, कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के उपाय, निर्माण कार्यों के लिए नए और सख्त नियम, पर्यावरण-अनुकूल शहरी विकास कुल मिलाकर, MPD-2041 का उद्देश्य दिल्ली को एक सस्टेनेबल, आधुनिक और पर्यावरण-संवेदनशील शहर के रूप में विकसित करना है, जहां विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों को समान प्राथमिकता दी जाए।

क्या कह रहे अधिकारी

दिल्ली के मास्टर प्लान-2041 (MPD-2041) को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया अब निर्णायक चरण में पहुंच रही है। अधिकारियों के अनुसार, इस संशोधित ड्राफ्ट को तैयार करने में कई प्रमुख संस्थान और विशेषज्ञ शामिल हैं। इस प्रक्रिया में School of Planning and Architecture Delhi (SPA), National Institute of Urban Affairs (NIUA), Municipal Corporation of Delhi, दिल्ली सरकार और Delhi Development Authority (DDA) मिलकर एक संयुक्त विशेषज्ञ समिति के रूप में काम कर रहे हैं।

यह समिति मास्टर प्लान के संशोधित ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने में जुटी हुई है। तैयार होने के बाद इसे शहरी विकास मंत्रालय के पास भेजा जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, उम्मीद है कि इस संशोधित ड्राफ्ट पर अंतिम मंजूरी अगले 2 से 3 महीनों के भीतर मिल सकती है। इसके बाद यह योजना औपचारिक रूप से लागू होने की दिशा में आगे बढ़ेगी।

क्यों 5-10 साल के मास्टर प्लान की डिमांड ?

1. जवाबदेही बढ़ाने का तर्क

लंबी अवधि वाले मास्टर प्लान में कई बार ऐसा होता है कि योजना बनाने वाले अधिकारी समय के साथ सेवानिवृत्त हो जाते हैं। ऐसे में योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी और जवाबदेही स्पष्ट रूप से तय नहीं हो पाती। समय सीमा कम होने से निगरानी और जिम्मेदारी अधिक स्पष्ट हो सकती है।

2. तेजी से बदलती शहरी जरूरतें

दिल्ली जैसे बड़े शहरों में आबादी, ट्रैफिक, बुनियादी ढांचा और आपदा प्रबंधन की जरूरतें तेजी से बदलती हैं। ऐसे में 20 साल का लंबा विज़न डॉक्यूमेंट कई बार वास्तविक परिस्थितियों से पीछे रह जाता है। शहरी नियोजन विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे समय-सीमा वाले मास्टर प्लान से शहर की नीतियों को अधिक लचीला (flexible) और अपडेटेड रखा जा सकता है, जिससे समय-समय पर सुधार करना आसान हो जाता है।

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