दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के दक्षिण परिसर स्थित सत्य निकेतन इलाके में जर्जर इमारत ढहने के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपी हरिराम और उनकी पत्नी उर्मिला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। वहीं, इमारत की देखरेख करने वाले उनके बेटे महेश को दो दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा गया है।
अवैध निर्माण और लापरवाही का आरोप
पुलिस पूछताछ में महेश ने बताया कि वह अपने माता-पिता की ओर से इमारत के रखरखाव की जिम्मेदारी संभालता था। जांच में सामने आया है कि अगस्त 2025 में इमारत को ‘हॉस्टल डेज’ नाम के पीजी ऑपरेटर को लीज पर दिया गया था।
पुलिस के मुताबिक, हादसे से पहले करीब 8-10 दिनों से बेसमेंट में बारिश का पानी और कचरा जमा था, जिसके चलते वहां मरम्मत का काम चल रहा था। इसी दौरान ग्राउंड फ्लोर पर व्यावसायिक विस्तार के लिए तोड़फोड़ और निर्माण कार्य भी कराया जा रहा था। आशंका है कि इन गतिविधियों से इमारत की संरचनात्मक मजबूती प्रभावित हुई।
हादसे के बाद राजस्थान भागे आरोपी
महेश के अनुसार, जिस दिन इमारत ढही, स्थानीय लोगों से घटना की जानकारी मिलने के बाद परिवार घबरा गया और घर छोड़कर राजस्थान के भिवाड़ी स्थित ससुराल में जाकर छिप गया। पुलिस ने बाद में आरोपियों को पकड़ लिया।
लेबर ठेकेदार सनोज भी हिरासत में
जांच में पुलिस को एक और अहम सफलता मिली है। निर्माण और तोड़फोड़ का काम कराने वाले लेबर ठेकेदार सनोज को उत्तर प्रदेश के कासगंज से हिरासत में लिया गया है। पुलिस टीम उसे दिल्ली ला रही है।
अधिकारियों के अनुसार, सनोज से निर्माण कार्य, इस्तेमाल की गई सामग्री और इमारत की संरचनात्मक स्थिति से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर पूछताछ की जाएगी। जांच का फोकस यह पता लगाने पर है कि किन परिस्थितियों में इमारत ढही और हादसे के लिए जिम्मेदारी किसकी थी।
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