सतीश सिंह, लखनऊ. यूपी में एनसीआर की तर्ज पर उत्तर प्रदेश स्टेट कैपिटल रीजन (यूपीएससीआर) के बेस मैप को मंजूरी मिल गई है. मंगलवार को लखनऊ विकास प्राधिकरण के पारिजात सभागार में मण्डलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद अब इसे एक्जीक्यूटिव कमेटी के समक्ष अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा. जिसके बाद यूपीएससीआर का रीजनल प्लान तैयार होगा.
लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि लखनऊ, सीतापुर, उन्नाव, हरदोई, बाराबंकी और रायबरेली जनपद को शामिल करते हुए स्टेट कैपिटल रीजन विकसित किया जा रहा है, जिसका कुल क्षेत्रफल 26741 वर्गकिलोमीटर है. उन्होंने बताया कि यूपी एससीआर के लिए जीआईएस आधारित क्षेत्रीय योजना तैयार की जा रही है. इसके अंतर्गत ट्रांसपोर्टेशन एंड मोबिलिटी, इकोनॉमी, इन्फ्रास्ट्रक्चर व टूरिज्म को लेकर 30 परियोजनाएं चिन्हित की गयी हैं.
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इन 6 जनपदों की कनेक्टिविटी को रफ्तार देने की दिशा में राज्य राजधानी माला (रीजनल रोड), एलिवेटेड पेरिफेरल रोड व रोड अपग्रेडेशन के कार्य शामिल हैं. इसके अलावा ट्रांसपोर्ट नगर, ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर, मेट्रो नेटवर्क विकसित करने की परियोजनाएं भी प्रस्तावित की गयी हैं. इसके अतिरिक्त अर्थ व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट, लॉजिस्टिक पार्क, फूड पार्क, लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे कॉरिडोर ओरिएंटेड डेवलपमेंट आदि परियोजनाएं चिन्हित की गयी हैं.
22 सदस्यीय कमेटी ने दी सहमति
उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि उत्तर प्रदेश स्टेट कैपिटल रीजन का बेस मैप तैयार कराया गया है. जिसके लिए सम्बंधित विकास प्राधिकरणों, राजस्व विभाग, लोक निर्माण विभाग, रेलवे, वन विभाग, नगर निगम, सिंचाई विभाग, उत्तर प्रदेश नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग समेत 22 संस्थाओं से अभिमत मांगा गया था. जिसमें सभी विभागों ने बेस मैप का परीक्षण करने के बाद अपनी सहमति प्रदान की है.
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उपाध्यक्ष ने बताया कि यूपीएससीआर से निवेश बढ़ेगा, रोजगार व व्यवसाय के अवसर सृजित होंगे. गांवों तक शहरी सुविधाएं पहुंचेंगी और लोगों को उनके क्षेत्र में ही निवास, व्यापार व नौकरी आदि के लिए बेेहतर माहौल मिलेगा. साथ ही जनपदों के बीच हाई स्पीड कनेक्टिविटी होने से माइग्रेशन में कमी आएगी. उपाध्यक्ष ने बताया कि यूपीएससीआर के बेस मैप की प्रमाणिकता के लिए सभी 6 जनपदों में ग्राउंड ट्रूथिंग (स्थलीय सत्यापन) का कार्य कराया गया है. इसमें कंसल्टेंट के साथ-साथ सम्बंधित विभागों ने भी सैटेलाइज इमेज व नक्शों से मिले डाटा का अलग-अलग स्थलों पर जाकर मिलान किया है. इस प्रक्रिया में कुल 2239 स्थानों पर ग्राउंड ट्रूथिंग करायी गयी है.



