ओम बिरला ने कहा कि विधायी संस्थानों में जनप्रतिनिधियों का आचरण अनुकरणीय होना चाहिए। सम्मेलन चार महत्वपूर्ण संकल्पों के साथ पूरी तरह संपन्न हुआ।
कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। राजधानी चंडीगढ़ में आयोजित कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन (CPA) इंडिया रीजन ज़ोन-II (नॉर्थ ज़ोन) के द्वितीय सम्मेलन के समापन अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लोकतांत्रिक संस्थाओं में बढ़ते व्यवधानों को गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि सदनों का बार-बार बाधित होना लोकतंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती है और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे अपने आचरण और संवाद के जरिए जनता का विश्वास मजबूत करें।
हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष की उपस्थिति में आयोजित समापन समारोह में ओम बिरला ने कहा कि जनता ने जनप्रतिनिधियों को बड़ी उम्मीदों के साथ चुना है, इसलिए विधायी संस्थानों में उनका आचरण अनुकरणीय होना चाहिए। उन्होंने कहा, “जैसा नेतृत्व का व्यवहार होता है, वैसा ही समाज बनता है।” बिरला ने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए सार्थक चर्चा, जनभागीदारी और जिम्मेदार व्यवहार बेहद जरूरी है।
दो दिवसीय सम्मेलन के सफल आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने बताया कि विभिन्न राज्यों से आए जनप्रतिनिधियों और नीति निर्माताओं ने अपने अनुभव, नवाचार और सुझाव साझा किए। सम्मेलन चार महत्वपूर्ण संकल्पों के साथ संपन्न हुआ, जिनका उद्देश्य विधायी संस्थाओं को अधिक जवाबदेह, प्रभावी और जनोन्मुख बनाना है। उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य को मजबूत संसदीय और विधायी संस्थाओं से जोड़ते हुए तकनीक के अधिकतम उपयोग, विधायकों के क्षमता विकास और नागरिक सहभागिता बढ़ाने पर बल दिया।
इस सम्मेलन में हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली सहित देश के 12 राज्यों की विधायिकाओं के पीठासीन अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण और विधानसभा उपाध्यक्ष कृष्ण लाल मिड्ढा भी मौजूद रहे। बिरला ने कहा कि 21वीं सदी भारत की सदी है और युवाओं, महिलाओं व समाज के हर वर्ग की आकांक्षाओं को केंद्र में रखकर आगे बढ़ना समय की मांग है।

