चंडीगढ़। क्या आने वाले वर्षों में देश के अलग-अलग रेल मार्गों पर हाइड्रोजन ट्रेनें दौड़ेंगी? इसका जवाब फिलहाल सिर्फ हरियाणा के जींद-सोनीपत रेलखंड पर चल रहे एक पायलट ट्रायल में छिपा है। केंद्र सरकार ने संसद में स्पष्ट कर दिया है कि देशभर में हाइड्रोजन ट्रेनों के विस्तार का फैसला इसी परियोजना के प्रदर्शन, लागत, तकनीकी विश्वसनीयता और परिचालन अनुभव के आधार पर लिया जाएगा।
लोकसभा में सांसद पी.सी. मोहन के प्रश्न के लिखित उत्तर में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि फिलहाल हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना पायलट आधार पर संचालित की जा रही है। इस दौरान ट्रेन के परिचालन, रखरखाव, ईंधन दक्षता, लागत और उपलब्ध संसाधनों का विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा। इसके बाद ही अन्य रेलखंडों पर हाइड्रोजन ट्रेनों के संचालन पर निर्णय लिया जाएगा।
हरियाणा बना देश की ग्रीन रेलवे तकनीक की प्रयोगशाला
जींद से सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर लंबा रेलखंड अब भारतीय रेलवे के लिए सबसे महत्वपूर्ण परीक्षण केंद्र बन गया है। इसी रूट पर यह परखा जा रहा है कि हाइड्रोजन ईंधन आधारित ट्रेन भारतीय मौसम, लंबी दूरी, नियमित संचालन और रखरखाव जैसी परिस्थितियों में कितनी प्रभावी साबित होती है।
यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो हरियाणा ही नहीं, बल्कि देश के कई गैर-विद्युतीकृत रेलमार्गों पर भी हाइड्रोजन ट्रेनों का संचालन शुरू किया जा सकता है।
शुरुआती प्रदर्शन से बढ़ा रेलवे का भरोसा
रेल मंत्री ने संसद को जानकारी दी कि 17 जुलाई को सेवा शुरू होने के बाद 25 जुलाई तक हाइड्रोजन ट्रेन 89 किलोमीटर के सेक्शन पर 1,256 किलोमीटर का सफल व्यावसायिक संचालन पूरा कर चुकी है। परियोजना के लिए जींद में विशेष हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र स्थापित किया गया है, जबकि ईंधन भंडारण और आपूर्ति व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है।
अब रेलवे परिचालन की निरंतरता, तकनीकी विश्वसनीयता, ईंधन दक्षता और रखरखाव लागत का गहन अध्ययन कर रहा है।
जल्दबाजी में नहीं होगा विस्तार
सरकार ने फिलहाल डीजल ट्रेनों के मुकाबले हाइड्रोजन ट्रेन की लागत पर कोई निष्कर्ष देने से भी इनकार किया है। रेलवे का कहना है कि पहले यह सुनिश्चित किया जाएगा कि यह तकनीक लंबे समय तक सुरक्षित, भरोसेमंद और आर्थिक रूप से व्यवहारिक है या नहीं। इसके बाद ही बड़े स्तर पर विस्तार का निर्णय लिया जाएगा।
देश के रेल भविष्य पर टिकी निगाहें
भारतीय रेलवे के अनुसार यह परियोजना दुनिया की सबसे लंबी ब्रॉडगेज लाइन पर संचालित होने वाली सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेन परियोजनाओं में शामिल है। यदि जींद-सोनीपत का यह ट्रायल पूरी तरह सफल रहता है तो भारत स्वच्छ ऊर्जा आधारित रेल परिवहन के क्षेत्र में वैश्विक पहचान बना सकता है। फिलहाल पूरे देश की नजर हरियाणा की इस एक परियोजना पर टिकी है, क्योंकि यही ट्रायल तय करेगा कि भविष्य में भारत के किन-किन रेलमार्गों पर हाइड्रोजन ट्रेनों की सीटी सुनाई देगी।
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