Odisha Desk, पुरी: ओडिशा के प्रसिद्ध साक्षीगोपाल मंदिर में सोमवार को भगवान साक्षीगोपाल और माता राधा की पवित्र ‘स्नान नीति’ श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हो गई। ज्येष्ठ पूर्णिमा (देव स्नान पूर्णिमा) के पावन अवसर पर सुबह से ही मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हो गई थी।

भोर होते ही मंदिर के कपाट खोले गए, जिसके बाद मंगला आरती, वेश मैलम, मर्दन और अवकाश जैसी महत्वपूर्ण नीतियां निभाई गईं। इसके बाद, मंदिर के मुख्य पुरोहितों और पुराण पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा किए गए सुगंधित और पवित्र जल के कलशों से ‘नहघर’ के पुष्पपालक सेवकों ने रत्नसिंहासन पर विराजमान भगवान साक्षीगोपाल और श्री राधा रानी को पूर्ण स्नान कराया।

राजवेश में भगवान के अलौकिक दर्शन

स्नान अनुष्ठान संपन्न होने के बाद प्रभु को ‘राजवेश’ में सजाया गया। भगवान को नए वस्त्र, स्वर्ण किरीट (सोने का मुकुट), चापसरी, मकर कुंडल, बेंग पाटिया, सुवर्ण बंशी (सोने की बांसुरी), अधरमाला और पाटी चंदन अर्पित किया गया। भगवान के इस दिव्य और अलौकिक रूप के दर्शन करने के लिए मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इसके साथ ही, रत्नसिंहासन से पतितपावन देव को ‘गोटी पहंडी’ (पारंपरिक शोभायात्रा) के जरिए स्नान वेदी पर लाया गया, जहां उनकी स्नान नीति, विशेष वेश, जातभोग, पूजा और महाआरती की गई।

सत्यवादी बकुलवन में ‘ठाकुर अजा’ की स्नान यात्रा

सत्यवादी बकुलवन के अधिपति भगवान जगन्नाथ के ‘अजा’ (नाना) के रूप में विख्यात ‘ठाकुर अजा’ श्री सिद्ध बलराम की स्नान यात्रा भी सोमवार को पूरी निष्ठा के साथ संपन्न हुई। सुबह मंगला आरती, अवकाश और बालभोग के बाद स्नान मंडप में संस्कार होम किया गया। इसके बाद सेवायत सोमनाथ महापात्र, लोकनाथ महापात्र और धडु महापात्र ने ठाकुर जी को पहंडी करके स्नान मंडप में बिठाया। वहां सुगंधित जल के कलशों से उन्हें पवित्र स्नान कराया गया और नए वस्त्र, फूलों के हार, टाहिया और खिचड़ी का विशेष भोग लगाया गया।

विभिन्न क्षेत्रों में हुआ ‘गजानन वेश’

इस पावन अवसर पर अठाईस ग्राम के पाताली ब्रह्म, मूल अलसा, शुकल ग्राम के तृतीया और दारू क्षेत्र रायचक्रधरपुर गांव में तीनों ठाकुरों (चतुर्धा मूरति) का प्रसिद्ध ‘गजानन वेश’ (हाथी वेश) आयोजित किया गया। इसके अलावा कांजिया मेलण पड़िया, बालिसाही, अलगुम और सारंगजोड़ी जैसे क्षेत्रों में भी पतितपावन देव की स्नान नीति का आयोजन किया गया, जहां हजारों भक्तों ने स्नान मंडप में भगवान के दर्शन कर पुण्य लाभ कमाया।

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