कटक : पवित्र देवस्नान पूर्णिमा और पंचसखा में से एक, महान संत व भविष्यवक्ता महापुरुष अच्युतानन्द दास के महाप्रयाण (शून्य समाधि) दिवस के अवसर पर कटक के निश्चिंतकोइली स्थित प्रसिद्ध नेमाल पद्मबन पीठ’ पूरी तरह से भक्तिमय और चंचल हो उठा है. इस पावन दिन पर महापुरुष अच्युतानन्द के दर्शन और श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिए लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है.

पद्मबन पीठ को लेकर उड़िया संस्कृति और जनमानस में एक गहरी आध्यात्मिक मान्यता जुड़ी हुई है. लोककथाओं के अनुसार, 16वीं शताब्दी के महान संत अच्युतानन्द दास की अंतिम इच्छा को पूरा करने के लिए स्वयं महाप्रभु जगन्नाथ (कालिया साआंत) वर्ष में एक बार साक्षात रूप में श्रीक्षेत्र (पुरी) छोड़कर पद्मबन में विराजमान होते हैं.
कहा जाता है कि पुरी में स्नान यात्रा का उत्सव संपन्न होने के तुरंत बाद महाप्रभु गुप्त रूप से नेमाल के पद्मबन पीठ में पहुंचते हैं. यही कारण है कि आज के दिन यह पावन पीठ श्रद्धालुओं के लिए ‘दूसरा श्रीक्षेत्र’ बन जाता है. भक्तों का दृढ़ विश्वास है कि देवस्नान पूर्णिमा पर इस पीठ में महापुरुष अच्युतानन्द के दर्शन करना, साक्षात भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने के समान ही पुण्यदायी और मोक्षप्रदायक है.
चित्रोत्पला नदी के तट पर स्थित इस सिद्ध पीठ में सुबह से ही विशेष पूजा-अर्चना, भजन, कीर्तन और धार्मिक गोष्ठियों का दौर जारी है. महापुरुष की शून्य समाधि पर श्रद्धासुमन अर्पित करने के साथ-साथ पारंपरिक ‘बाली मेला’ का भी आयोजन किया गया है, जो यहां के मुख्य आकर्षणों में से एक है. इस पीठ की एक अनूठी विशेषता यह भी है कि यहाँ हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग समान श्रद्धा के साथ महापुरुष की समाधि की पूजा करते हैं, जो सामाजिक सद्भाव और आपसी भाईचारे का एक अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है.
प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और सुरक्षात्मक व्यवस्थाओं के कड़े इंतजाम किए गए हैं, ताकि देश-विदेश से आने वाले भक्तों को दर्शन करने में कोई असुविधा न हो. पूरा क्षेत्र ‘जय जगन्नाथ’ और महापुरुष अच्युतानन्द के भजनों की गूंज से आध्यात्मिक रस में सराबोर नजर आ रहा है.

