सतीश सिंह, लखनऊ. स्वतंत्रता दिवस पर लखनऊ का विधानभवन परिसर देशभक्ति, संस्कृति और राष्ट्रीय एकता के रंगों से सराबोर नजर आया. 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानभवन के सामने राष्ट्रीय ध्वज फहराया. इसके बाद ‘वंदे मातरम’ की गूंज, सैन्य बैंड की धुन, लोकनृत्यों की थाप, भगवान राम-सीता की झांकी और आसमान से हुई पुष्प वर्षा ने समारोह को यादगार बना दिया.

समारोह की शुरुआत सुबह करीब 9:15 बजे ‘वंदे मातरम’ की प्रस्तुति से हुई. भारतखण्डे संगीत विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने राष्ट्रगीत की प्रस्तुति से माहौल को देशभक्ति से भर दिया. 32वीं और 35वीं वाहिनी पीएसी के जवानों के साथ मिलिट्री बैंड ने अनुशासन और शौर्य का प्रदर्शन कर समारोह की गरिमा बढ़ाई. मुख्यमंत्री द्वारा तिरंगे गुब्बारे आसमान में छोड़े जाने के साथ ही परिसर भारत माता के जयघोष से गूंज उठा.

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इस बार समारोह का सबसे आकर्षक पक्ष ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की थीम रही. संस्कृति विभाग की ओर से देश के अलग-अलग हिस्सों की लोक परंपराओं को एक मंच पर प्रस्तुत किया गया. बुंदेलखंड, पूर्वांचल, अवध और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, छत्तीसगढ़, गुजरात और बिहार के कलाकारों ने अपनी लोक कलाओं की छटा बिखेरी. कहीं ‘गणपति बप्पा मोरया’ की गूंज सुनाई दी तो कहीं छठी मैया के लोकगीतों ने माहौल को भावनात्मक बना दिया. अलग-अलग राज्यों के नृत्य और संगीत ने यह संदेश दिया कि भाषाएं और परंपराएं भले अलग हों, लेकिन देश की आत्मा एक है.

राम-सीता की झांकी ने खींचा ध्यान

गौरी कला मंडपम ग्रुप की भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण की झांकी समारोह का प्रमुख आकर्षण रही. वाराणसी की कुमकुम रस्तोगी ने माता सीता, ऋत्विक सिंह ने भगवान राम और आयुष साहू ने लक्ष्मण की भूमिका निभाई. करीब 16 कलाकारों की टीम ने इस प्रस्तुति को तैयार किया था. कलाकारों ने बताया कि मुख्यमंत्री के सामने स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर प्रस्तुति देना उनके लिए गौरव का क्षण रहा. टीम ने करीब पांच दिनों तक संगीत नाट्य अकादमी में लगातार अभ्यास किया था.

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कथक की थाप से लेकर शंखनाद तक

भारतखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय के कलाकारों ने कथक और लोकनृत्य की प्रस्तुति से दर्शकों को बांधे रखा. 20 कलाकारों ने कथक और छह कलाकारों ने लोकनृत्य प्रस्तुत किया. कथक में तराना की प्रस्तुति विशेष आकर्षण रही. मथुरा-वृंदावन से आए रवि शंकर के शंख वादन ने समारोह में आध्यात्मिक रंग भर दिया. कलाकारों ने बताया कि राष्ट्रीय पर्व के इस मंच पर प्रस्तुति देना उनके लिए गर्व का अनुभव रहा.

लखनऊ में गूंजा बस्तर का ‘रेला पाटा’

छत्तीसगढ़ से आए 19 कलाकारों ने बस्तर की पारंपरिक लोक कला ‘रेला पाटा’ प्रस्तुत कर समारोह में आदिवासी संस्कृति की झलक दिखाई. दल का नेतृत्व कर रहे कुलभूषण चंद्राकर ने बताया कि टीम ने करीब एक सप्ताह तैयारी की थी. उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों के कलाकारों के साथ एक मंच साझा करना बेहद खास अनुभव रहा. उन्होंने छत्तीसगढ़ को माता कौशल्या का मायका बताते हुए कहा कि भगवान राम की धरती उत्तर प्रदेश में बस्तर की संस्कृति प्रस्तुत करना उनके लिए गर्व की बात है.

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अरुणाचल से महाराष्ट्र तक, कलाकारों ने बांधा समां

अरुणाचल प्रदेश और महाराष्ट्र से आए कलाकारों ने भी अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियों से समारोह में विविधता के रंग भरे. महाराष्ट्र की 22 सदस्यीय टीम ने करीब एक सप्ताह तैयारी की थी. कलाकारों ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों से आए कलाकारों के साथ एक मंच पर प्रस्तुति देना ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना को साकार करने जैसा रहा. सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच जब आसमान से फूल बरसे तो पूरा परिसर तालियों और जयघोष से गूंज उठा. तिरंगे गुब्बारों से सजा आसमान और हाथों में राष्ट्रध्वज लिए बच्चे समारोह की तस्वीर को और जीवंत बना रहे थे. देशभक्ति गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच लखनऊ में स्वतंत्रता दिवस का जश्न राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक गौरव का संदेश देता नजर आया.