दिल्ली में सर्दियों के दौरान बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच निर्माण एवं विकास कार्यों पर लगने वाले प्रतिबंध की अवधि इस साल कम किए जाने की संभावना है। दिल्ली सरकार के संकेतों के मुताबिक, प्रदूषण नियंत्रण के लिए निर्माण गतिविधियों पर रोक 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक सीमित की जा सकती है। हालांकि, अंतिम निर्णय उस समय की वायु गुणवत्ता और प्रदूषण की स्थिति को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।

बड़ी विकास परियोजनाओं को मिलेगा अधिक समय

यदि यह व्यवस्था लागू होती है, तो दिल्ली में चल रही सड़क, फ्लाईओवर, अस्पताल और जल निकासी जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को पिछले वर्षों की तुलना में निर्माण कार्य के लिए अधिक समय मिल सकेगा। इससे परियोजनाओं को तय समयसीमा में पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

राजधानी में करावल नगर फ्लाईओवर, प्रमुख सड़कों के निर्माण एवं सुधार, अस्पतालों और ड्रेनेज से जुड़ी कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इसके अलावा यातायात व्यवस्था बेहतर करने के लिए एलिवेटेड कॉरिडोर और अन्य सड़क परियोजनाएं भी प्रस्तावित या निर्माणाधीन हैं।

लंबे प्रतिबंध से बढ़ती है परियोजनाओं की लागत

पिछले वर्षों में नवंबर से जनवरी के बीच खराब वायु गुणवत्ता के कारण चरणबद्ध तरीके से निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाए जाते रहे हैं। लंबे समय तक काम रुकने से परियोजनाओं की समयसीमा प्रभावित होने के साथ मशीनरी, श्रमिकों और निर्माण संसाधनों की लागत भी बढ़ सकती है।

विशेष रूप से अस्पताल और परिवहन से जुड़ी परियोजनाओं में देरी का सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है। ऐसे में निर्माण गतिविधियों को लंबे समय तक जारी रखने की अनुमति विकास कार्यों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

प्रदूषण नियंत्रण और विकास के बीच संतुलन जरूरी

सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती वायु प्रदूषण नियंत्रण और विकास कार्यों के बीच संतुलन बनाने की होगी। दिसंबर और जनवरी में प्रदूषण बढ़ने की स्थिति में प्रतिबंध की अवधि कम रखना तभी प्रभावी होगा, जब अन्य प्रदूषण नियंत्रण उपाय भी पर्याप्त रूप से कारगर हों। अंतिम फैसला वास्तविक वायु गुणवत्ता और परिस्थितियों के आधार पर महत्वपूर्ण होगा।

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