कुंदन कुमार, पटना। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। इसी क्रम में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद मनोज झा ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने खुलकर कहा है कि यह इस्तीफा और कुछ नहीं बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल के भीतर पल रहे अहंकार और हठधर्मिता को मिली पहली बड़ी शिकस्त है।
​मनोज झा ने अपने बयानों में इस बात पर जोर दिया कि देश के युवाओं के सुलगते जोश और उनके गुस्से के भारी दबाव के डर से ही आखिरकार धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से हटना पड़ा है। आरजेडी का यह मानना है कि देश का युवा वर्ग अब अपनी शिक्षा, भविष्य और अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। सरकार को आखिरकार युवा शक्ति की ताकत के आगे झुकना ही पड़ा।

​छात्रों पर हुए जुल्म और लाठीचार्ज का हुआ अंत

​इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी बात रखते हुए पटना से रिपोर्टर कुंदन कुमार के इनपुट्स के आधार पर आरजेडी के प्रदेश प्रवक्ता एजाज अहमद ने भी तीखा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि आज जिस प्रकार से धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सामने आया है, उसने पूरे देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की किरकिरी करा दी है।
​एजाज अहमद ने तंज कसते हुए कहा कि आंदोलनरत छात्रों के साथ इस सरकार ने कैसा-कैसा व्यवहार किया, उन्हें किस प्रकार की अपमानजनक बातें बोली गईं और विरोध प्रदर्शन कर रहे मासूम छात्रों पर किस तरह से लाठियां और डंडे बरसाए गए, यह आज देश की आम जनता बहुत अच्छी तरह जानती और समझती है। सरकार चाहे किसी भी दल की क्यों न हो, लेकिन अंततः छात्रों और आम जनमानस की जायज मांगों के आगे सत्ता को झुकना ही पड़ता है। आज यह बात पूरी तरह सच साबित हो चुकी है कि युवा शक्ति के संघर्ष को लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता।
​धर्मेंद्र प्रधान का यह इस्तीफा राजनीतिक हलकों में एक बड़ा भूचाल लेकर आया है। विपक्षी दल इसे लगातार सरकार की तानाशाही और दमनकारी नीतियों के खिलाफ एक बड़ी नैतिक जीत के रूप में देख रहे हैं। आरजेडी नेताओं के इन बयानों से यह साफ जाहिर होता है कि आने वाले समय में विपक्ष इस मुद्दे को और अधिक आक्रामक तरीके से उठाने की पूरी तैयारी में है, ताकि युवाओं और छात्रों के बीच सरकार की विफलताओं को प्रमुखता से रखा जा सके।