सुरेंद्र जैन, धरसीवां। सोन्डरा में प्रस्तावित केमिकल प्लांट को लेकर आसपास के गांवों में चिंता बढ़ गई है। आगामी 9 सितंबर को ग्राम सोन्डरा स्थित श्री राधा भवन में प्रस्तावित पर्यावरणीय जनसुनवाई की जानकारी सामने आने के बाद ग्रामीणों के बीच इसे लेकर चर्चा तेज हो गई है। लोगों को आशंका है कि यदि क्षेत्र में केमिकल प्लांट स्थापित हुआ तो भविष्य में भूजल प्रदूषित होने की स्थिति पैदा हो सकती है और उन्हें पेयजल संकट का सामना करना पड़ सकता है।

जानकारी के मुताबिक, कुछ समय पहले ग्राम पंचायत सोन्डरा की अनुमति के बाद बहेसर मार्ग पर छोकरा नाला के समीप प्रस्तावित केमिकल फैक्ट्री के लिए जमीन को समतल करने का काम शुरू किया गया। मौके पर चल रहे काम को देखकर स्थानीय लोगों ने जानकारी जुटाई तो उन्हें पता चला कि यहां केमिकल प्लांट प्रस्तावित है। इसके बाद यह बात आसपास के गांवों में तेजी से फैल गई और ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई।
ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता क्षेत्र के भूजल को लेकर है। उनका कहना है कि उरला से लगे कन्हरा और पठारीडीह गांवों में उद्योगों के कारण भूजल दूषित होने की बात सामने आती रही है। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि कहीं सोन्डरा, सांकरा और बहेसर क्षेत्र में भी भविष्य में ऐसी स्थिति न बन जाए।
कांग्रेस नेता बोले- गांव के भविष्य से खिलवाड़ नहीं होने देंगे
केमिकल प्लांट की पर्यावरणीय जनसुनवाई की जानकारी मिलने के बाद पूर्व ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष दुर्गेश वर्मा ने इसका विरोध किया है। उन्होंने कहा कि इस प्लांट को किसी भी हाल में क्षेत्र में स्थापित नहीं होने दिया जाएगा। उनके मुताबिक केमिकल प्लांट से निकलने वाले अपशिष्ट का असर आसपास के नाले, भूजल और खारुन नदी तक पड़ सकता है।
दुर्गेश वर्मा ने कहा कि गांव के भविष्य के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा। क्षेत्र में पहले से उद्योगों के कारण पर्यावरण और पानी को लेकर लोगों की चिंताएं हैं। ऐसे में आबादी और गांवों के आसपास इस तरह के प्लांट स्थापित करना ग्रामीणों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
कन्हरा में दूषित हुआ भूजल तो दूसरे गांव से मंगाना पड़ा पानी
ग्रामीणों की चिंता को समझने के लिए कन्हरा गांव का उदाहरण भी सामने है। उरला से लगे कन्हरा में जब उद्योग स्थापित किए जा रहे थे, तब ग्रामीणों ने इसका विरोध किया था। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि उस समय उनकी आपत्तियों पर अपेक्षित सुनवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों के मुताबिक, बाद में उद्योगों से निकलने वाले केमिकल के जमीन के अंदर पहुंचने के कारण गांव का भूजल दूषित हो गया और लोगों के सामने पेयजल का संकट खड़ा हो गया। स्थिति ऐसी बनी कि ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए दूसरे गांव पर निर्भर होना पड़ा।
बताया जाता है कि ग्रामीणों ने तत्कालीन विधायक देवजीभाई पटेल से गांव में पेयजल की व्यवस्था कराने की मांग की थी। ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए तत्कालीन विधायक ने करीब दो से ढाई किलोमीटर दूर स्थित कुम्हारी गांव के सरपंच से सहमति लेकर वहां बोर कराया। इसके बाद कुम्हारी से कन्हरा तक पाइपलाइन बिछाई गई और वहां से कन्हरा में पेयजल की आपूर्ति शुरू की गई।
इसी तरह पठारीडीह में भी भूजल दूषित होने के कारण ग्रामीणों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ने की बात कही जा रही है।
अब सोन्डरा-बहेसर के सामने भी वही सवाल
कन्हरा और पठारीडीह के कथित अनुभवों के बाद अब सोन्डरा, सांकरा और बहेसर क्षेत्र के ग्रामीणों के सामने भी यही सवाल खड़ा हो गया है कि यदि यहां केमिकल प्लांट स्थापित होता है तो क्या आने वाले वर्षों में भूजल की गुणवत्ता प्रभावित होगी?
ग्रामीणों का कहना है कि पानी उनकी सबसे बड़ी जरूरत है। यदि भूजल दूषित हुआ तो इसका सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ेगा। इसलिए जनसुनवाई में ग्रामीण अपनी आशंकाएं और आपत्तियां प्रशासन के सामने रखने की तैयारी में हैं।
अब सभी की नजर 9 सितंबर को होने वाली पर्यावरणीय जनसुनवाई पर है। जनसुनवाई में ग्रामीणों की आपत्तियों पर क्या चर्चा होती है और प्रस्तावित केमिकल प्लांट को लेकर प्रशासन एवं संबंधित विभाग क्या रुख अपनाते हैं, यह देखने वाली बात होगी।
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