आशुतोष तिवारी, जगदलपुर। बस्तर के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य पर अब जर्जर स्कूल भवनों का खतरा मंडरा रहा है। जिन स्कूलों में बच्चों का भविष्य संवरना चाहिए वहां कई बच्चे आज बदहाल और अति जर्जर भवनों के बीच पढ़ने को मजबूर हैं। कई स्कूलों में भवन की खराब स्तिथि के कारण नियमित कक्षाएं संचालित करने के लिए पर्याप्त कमरे तक उपलब्ध नहीं है।
पढ़िए पूरी खबर
दरअसल, सरकारी आंकड़े इस स्थिति की गंभीरता खुद बयां कर रहे हैं। बस्तर जिले में ही 124 स्कूल भवन अति जर्जर स्थिति में पहुंच चुके हैं। इनमें 76 प्राइमरी और 48 मिडिल स्कूल भवन शामिल हैं। हालात इतने खराब हैं कि कई स्कूलों में नियमित कक्षाओं के लिए कमरे तक उपलब्ध नहीं हैं। कहीं बच्चों की कक्षाएं अतिरिक्त भवनों में लग रही हैं।
पंचायत भवन में लग रही क्लास
उदाहरण के रूप में तोकापाल इलाके के एर्राकोर्ट मिडिल स्कूल अति जर्जर की स्थिति में होने की वजह से पूरी स्कूल पंचायत भवन में संचालित हो रहे हैं, तो कहीं लैब, प्रधानाध्यापक के कार्यालय में बच्चों को बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। बारिश के मौसम में परेशानी और बढ़ जाती है। जर्जर भवन, खराब छत और भवनों की गुणवत्ता को लेकर सामने आ रही समस्याओं के बीच सबसे बड़ी चिंता बच्चों की सुरक्षा की है।
DEO ने दिए निर्देश
जिला शिक्षा अधिकारी बलिराम बघेल ने भी माना है कि जिले में 124 विद्यालय भवन अति जर्जर हो चुके हैं। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए इन स्कूलों की कक्षाएं सुरक्षित स्थानों पर संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं जर्जर भवनों की जानकारी शासन-प्रशासन को भी भेजी गई है।
खड़े हुए सवाल
सवाल अब सिर्फ वैकल्पिक व्यवस्था का नहीं है। सवाल यह भी है कि बच्चों को कब तक जर्जर भवनों से दूर रखकर पढ़ाया जाएगा और इन स्कूलों के स्थायी समाधान पर कब काम होगा क्योंकि बच्चों का भविष्य मजबूत बनाना है, तो उनकी पढ़ाई की नींव भी मजबूत और सुरक्षित होनी चाहिए।
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