कुंदन कुमार/​पटना। बिहार में शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE 4.0) को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। छात्र नेता दिलीप कुमार ने राज्य सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए इसे अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि शिक्षक भर्ती में पदों की संख्या 46 हजार होनी चाहिए, जबकि सरकार मात्र 20 हजार पदों पर बहाली की बात कर रही है।

​46 हजार पदों की मांग और 15 लाख युवाओं का

​दिलीप कुमार ने कहा कि वर्तमान में 15 लाख से अधिक अभ्यर्थी बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं और रोजगार की राह देख रहे हैं। उन्होंने सरकार के 20 हजार पदों के फैसले को अनुचित बताते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में युवाओं के संघर्ष को नजरअंदाज करना गलत है। इस मांग को मजबूती देने के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से मुलाकात करने का निर्णय लिया है।

​फर्जी शिक्षकों की जांच से खुलेंगे नए रास्ते

​छात्र नेता ने एक बड़ा खुलासा करते हुए आरोप लगाया कि पिछली शिक्षक बहालियों में 50 हजार से अधिक ‘फर्जी शिक्षक’ कार्यरत हैं। उन्होंने सरकार को चुनौती दी कि यदि इन फर्जी शिक्षकों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो न केवल सच्चाई सामने आएगी, बल्कि उन्हें हटाने के बाद रिक्तियों की संख्या में स्वतः ही भारी वृद्धि हो जाएगी। उन्होंने मांग की कि सरकार पहले इनकी उच्च स्तरीय जांच करवाए।

​पटना पुलिस के रवैये पर आक्रोश

​आंदोलन के दौरान पटना पुलिस द्वारा किए गए व्यवहार पर दिलीप कुमार ने गहरा रोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हम वर्षों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठा रहे हैं, लेकिन इस बार पुलिस ने सड़क से लेकर जेल तक जिस तरह की बर्बरता की और छात्रों के साथ मारपीट की, वह बेहद निंदनीय है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि दोषी पुलिसकर्मियों की पहचान कर उन पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।
​उन्होंने अंत में चेतावनी देते हुए कहा कि अभ्यर्थी अब झुकने वाले नहीं हैं। सरकार को युवाओं की बात सुननी ही होगी। छात्र नेता के इस बयान के बाद बिहार की सियासत और शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है, जहां सरकार और अभ्यर्थियों के बीच गतिरोध बढ़ता ही जा रहा है।