कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। चंबल अंचल के सबसे बड़े जयारोग्य अस्पताल में डॉक्टरों की सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। एक हजार बिस्तर अस्पताल परिसर में ड्यूटी डॉक्टरों के साथ मरीज के अटेंडर्स द्वारा कथित मारपीट के विरोध में जूनियर और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों ने OPD में काम बंद कर प्रदर्शन किया। डॉक्टरों ने अस्पताल अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर 24 घंटे के भीतर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और पुलिस चौकी बनाने पर निर्णय लेने की मांग की है। मांगें पूरी नहीं होने पर डॉक्टरों ने अनिश्चितकालीन विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
दरअसल, बीती रात करीब 12 से 1 बजे के बीच एक मरीज को एक हजार बिस्तर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों के मुताबिक, मरीज के साथ आए चार से पांच अटेंडर्स ने ड्यूटी पर मौजूद जूनियर और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ मारपीट की।जूनियर डॉक्टर अनंत अय्यर का आरोप है कि मरीज को वेंटिलेटर लगाने की प्रक्रिया के दौरान अटेंडर्स ने उनके साथ चांटे मारे। जब सीनियर डॉक्टर बचाव के लिए पहुंचे, तो उनके साथ भी मारपीट की गई। इसके बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। डॉक्टरों का कहना है कि मरीज के दोनों फेफड़ों में संक्रमण था और घटना के बाद अटेंडर्स मरीज को अस्पताल में छोड़कर चले गए।
घटना के विरोध में सभी जूनियर और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों ने OPD में काम बंद कर अपना विरोध दर्ज कराया। डॉक्टरों की मांग है कि मारपीट करने वालों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए और अस्पताल परिसर में 24 घंटे पुलिस की मौजूदगी सुनिश्चित की जाए,डॉक्टरों ने यह भी कहा कि अस्पताल में वीआईपी कल्चर खत्म होना चाहिए। किसी मरीज के राजनीतिक या अन्य प्रभावशाली लोगों से संबंध होने के कारण डॉक्टरों पर अतिरिक्त दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए।
डॉक्टरों ने अस्पताल अधीक्षक को ज्ञापन सौंपते हुए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उनका कहना है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे अनिश्चितकालीन काम बंद करने के लिए मजबूर होंगे।फिलहाल OPD प्रभावित हुई है, जबकि अन्य चिकित्सा सेवाएं जारी रहने की बात कही गई है।
वहीं अस्पताल अधीक्षक डॉ. सुधीर सक्सेना ने डॉक्टरों के साथ हुई मारपीट की जानकारी मिलने की बात कही है। उनका कहना है कि डॉक्टरों ने सुरक्षा से जुड़ी कई मांगें रखी हैं, जिनका नियमों के अनुसार परीक्षण किया जा रहा है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा और बैठक भी की गई है।अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, विभागाध्यक्षों और मेडिकल कॉलेज के डीन की मौजूदगी में पूरे मामले पर मंथन किया जाएगा। आवश्यक कदम प्रशासन की मदद से उठाए जाएंगे, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
अब बड़ा सवाल यह है कि मरीजों की जान बचाने में जुटे डॉक्टरों को अस्पताल परिसर में सुरक्षा कब मिलेगी? डॉक्टरों ने 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। ऐसे में प्रबंधन और प्रशासन के अगले कदम पर सभी की नजर रहेगी।
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